Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
Aug 27, 2016 · 1 min read

ज़िंदगी

ज़िंदगी के इतने सवाल क्यों हैं ?
ज़िंदगी में इतने बवाल क्यों हैं ?
तक़ाज़े तक़ाज़े और तक़ाज़े,
इनमें यूँ इतने उछाल क्यों हैं?
हैं मुहब्बतें ही फरमान रब का,
नफरत में इतने उछाल क्यों हैं?
मिला वो जो तू लिखा के लाया,
और न मिलने का मलाल क्यों है?
समय का कस कर पड़ा है चाँटा,
गाल उनके वरना लाल क्यों हैं।

1 Comment · 161 Views
You may also like:
मां की महानता
Satpallm1978 Chauhan
तुम ना आए....
डॉ.सीमा अग्रवाल
पिता - जीवन का आधार
आनन्द कुमार
महँगाई
आकाश महेशपुरी
मैं तो सड़क हूँ,...
मनोज कर्ण
"खुद की तलाश"
Ajit Kumar "Karn"
वो बरगद का पेड़
Shiwanshu Upadhyay
कुछ नहीं इंसान को
Dr fauzia Naseem shad
छीन लेता है साथ अपनो का
Dr fauzia Naseem shad
गांव शहर और हम ( कर्मण्य)
Shyam Pandey
बस एक निवाला अपने हिस्से का खिला कर तो देखो।
Gouri tiwari
परिवाद झगड़े
ईश्वर दयाल गोस्वामी
विश्व फादर्स डे पर शुभकामनाएं
सुरेश कुमार चतुर्वेदी
बड़ी मुश्किल से खुद को संभाल रखे है,
Vaishnavi Gupta
भूखे पेट न सोए कोई ।
Buddha Prakash
मिट्टी की कीमत
निकेश कुमार ठाकुर
✍️कोई तो वजह दो ✍️
Vaishnavi Gupta
राम घोष गूंजें नभ में
शेख़ जाफ़र खान
दो पल मोहब्बत
श्री रमण 'श्रीपद्'
ऐसे थे पापा मेरे !
Kuldeep mishra (KD)
वो हैं , छिपे हुए...
मनोज कर्ण
बेटियों की जिंदगी
AMRESH KUMAR VERMA
जैसे सांसों में ज़िंदगी ही नहीं
Dr fauzia Naseem shad
फेसबुक की दुनिया
सुरेन्द्र शर्मा 'शिव'
दिल से रिश्ते निभाये जाते हैं
Dr fauzia Naseem shad
Nurse An Angel
Buddha Prakash
जब भी तन्हाईयों में
Dr fauzia Naseem shad
बूँद-बूँद को तरसा गाँव
ईश्वर दयाल गोस्वामी
आपसा हम जो दिल
Dr fauzia Naseem shad
ओ मेरे !....
ईश्वर दयाल गोस्वामी
Loading...