Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings

ग़ज़ल।दर्द के ऐसे निवाले पल रहे है आजकल ।

ग़ज़ल । दर्द के ऐसे निवाले पल रहे है आज़कल ।

सादगी मे लोग बेशक़ ढल रहे है आज़कल ।
बेवफ़ाई पर यक़ीनन कर रहे है आजकल ।

झूठ की दुनियां बसाकर लूटने की साजिशें ।
अश्क़ आंखों मे किसी के भर रहे है आज़कल ।

रहनुमां खूंखार बाग़ी मतलबी बेईमान से ।
दे दख़ल हर जिंदगी मे ख़ल रहे है आज़कल ।

आम जनता नींद मे बस चल रही है रास्ता ।
जागती क़ानूनी रश्में गल रही हैं आज़कल ।

बेबसी मे जी रहे जो इक उजाले के लिए ।
रात अंधेरी उन्हें भी छल रही है आज़कल ।

आशिकों मे भर रहा है वक़्त भी हैवानियत ।
प्यार की रश्में जहां मे मर रही है आज़कल ।

मौत “रकमिश” हो गयी सस्ती यकीं तू मान ले ।
दर्द के ऐसे निवाले पल रहे है आज़कल ।

राम केश मिश्र
सुलतापुर उत्तर प्रदेश

276 Views
You may also like:
श्री राम स्तुति
सुरेन्द्र शर्मा 'शिव'
आया रक्षाबंधन का त्योहार
Anamika Singh
अब आ भी जाओ पापाजी
संदीप सागर (चिराग)
शरद ऋतु ( प्रकृति चित्रण)
Vishnu Prasad 'panchotiya'
कशमकश
Anamika Singh
पिता
Neha Sharma
धन्य है पिता
Anil Kumar
टोकरी में छोकरी / (समकालीन गीत)
ईश्वर दयाल गोस्वामी
कौन दिल का
Dr fauzia Naseem shad
औरों को देखने की ज़रूरत
Dr fauzia Naseem shad
कैसा हो सरपंच हमारा / (समसामयिक गीत)
ईश्वर दयाल गोस्वामी
उनकी यादें
Ram Krishan Rastogi
गांव शहर और हम ( कर्मण्य)
Shyam Pandey
हमनें ख़्वाबों को देखना छोड़ा
Dr fauzia Naseem shad
यादें वो बचपन के
Khushboo Khatoon
"पिता की क्षमता"
पंकज कुमार कर्ण
झूला सजा दो
Buddha Prakash
गुमनाम ही सही....
DEVSHREE PAREEK 'ARPITA'
पितु संग बचपन
मनोज कर्ण
नित नए संघर्ष करो (मजदूर दिवस)
श्री रमण 'श्रीपद्'
“ तेरी लौ ”
DESH RAJ
सागर ही क्यों
Shivkumar Bilagrami
आह! भूख और गरीबी
Dr fauzia Naseem shad
बाबूजी! आती याद
श्री रमण 'श्रीपद्'
वक़्त किसे कहते हैं
Dr fauzia Naseem shad
बुद्ध भगवान की शिक्षाएं
सुरेश कुमार चतुर्वेदी
कुछ दिन की है बात ,सभी जन घर में रह...
Pt. Brajesh Kumar Nayak
✍️कलम ही काफी है ✍️
Vaishnavi Gupta
रावण का प्रश्न
Anamika Singh
माँ की परिभाषा मैं दूँ कैसे?
साहित्य लेखन- एहसास और जज़्बात
Loading...