Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
Sep 9, 2016 · 1 min read

ग़ज़ल/गीतिका

एक ग़ज़ल

आई जब तू जिन्दगी हँसने लगी
तू मेरे हर सपने में रहने लगी |

धीरे धीरे तेरी चाहत बढ़ गई
देखा तू भी प्रेम में झुकने लगी |

जिन्दगी का रंग परिवर्तन हुआ
प्रेम धारा जान में बहने लगी |

राह चलते हम गए मंजिल दिखा
फिर भी जीना जिन्दगी गिनने लगी |

देखिये शादी के इस बाज़ार में
हाट में दुल्हन यहाँ बिकने लगी |

शमअ बिन यह तम डराने जब लगा
जिन्दगी को जिन्दगी छलने लगी |

दीप का लौ झिलमिलाते ही रहे
जब इक आँधी तेजी से बहने लगी |

कालीपद ‘प्रसाद’

229 Views
You may also like:
आतुरता
अंजनीत निज्जर
पिता की नसीहत
सुरेश कुमार चतुर्वेदी
वो हैं , छिपे हुए...
मनोज कर्ण
"पिता का जीवन"
पंकज कुमार कर्ण
असफ़लताओं के गाँव में, कोशिशों का कारवां सफ़ल होता है।
Manisha Manjari
✍️कोई तो वजह दो ✍️
Vaishnavi Gupta
गुलामी के पदचिन्ह
मनोज कर्ण
✍️पढ़ रही हूं ✍️
Vaishnavi Gupta
Forest Queen 'The Waterfall'
Buddha Prakash
एक कतरा मोहब्बत
श्री रमण 'श्रीपद्'
काश बचपन लौट आता
Anamika Singh
अधूरी बातें
सुरेन्द्र शर्मा 'शिव'
✍️बदल गए है ✍️
Vaishnavi Gupta
बदलते हुए लोग
kausikigupta315
पिता एक विश्वास - डी के निवातिया
डी. के. निवातिया
रोटी संग मरते देखा
शेख़ जाफ़र खान
दुनिया की आदतों में
Dr fauzia Naseem shad
मजबूर ! मजदूर
शेख़ जाफ़र खान
ज़िंदगी से सवाल
Dr fauzia Naseem shad
रावण - विभीषण संवाद (मेरी कल्पना)
Anamika Singh
जीवन-रथ के सारथि_पिता
मनोज कर्ण
हमें अब राम के पदचिन्ह पर चलकर दिखाना है
Dr Archana Gupta
ईश्वरतत्वीय वरदान"पिता"
Archana Shukla "Abhidha"
लाचार बूढ़ा बाप
jaswant Lakhara
जितनी मीठी ज़ुबान रक्खेंगे
Dr fauzia Naseem shad
पिता का प्रेम
Seema gupta ( bloger) Gupta
गर्म साँसें,जल रहा मन / (गर्मी का नवगीत)
ईश्वर दयाल गोस्वामी
उसे देख खिल जातीं कलियांँ
श्री रमण 'श्रीपद्'
जीवन में
Dr fauzia Naseem shad
रेलगाड़ी- ट्रेनगाड़ी
Buddha Prakash
Loading...