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8 Jul 2016 · 1 min read

ग़ज़ल

चलो दीवानगी से दिल लगायें.,
घड़ी भर को खुशी से दिल लगायें,,

है पैकर आदमी धोखा-धड़ी का.,
भला क्या आदमी से दिल लगायें,,

अंधेरा जब के रास आने लगा है.,
तो फिर क्यूँ रौशनी से दिल लगायें,,

जो अपने थे वो सब निकले पराये.,
किसी इक अजनबी से दिल लगायें,,

हमें मालूम है ये बे-वफ़ा है.,
कहाँ तक ज़िंदगी से दिल लगायें,,

सिराज अब शाहर से उकता गया दिल.,
चलो आवारगी से दिल लगायें..!

सिराज देहलवी@ ओ.पी.अग्रवाल
०८/०७/२०१६

Language: Hindi
Tag: कविता
1 Like · 2 Comments · 188 Views
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