Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
Sep 22, 2017 · 1 min read

ख़ारे धारे …

ख़ारे धारे …

कुछ गिले हमारे हैं और कुछ गिले तुम्हारे हैं l
…दिलों के इस खेल में हम दोनों ही दिल हारे हैं l
…….दोनों ही अब तन्हा हैं,दोनों ही वक्त के मारे हैं –
…………प्यार की सौगात फकत आँखों के ख़ारे धारे हैं l

सुशील सरना

132 Views
You may also like:
दामन भी अपना
Dr fauzia Naseem shad
आई राखी
सुरेन्द्र शर्मा 'शिव'
"फिर से चिपको"
पंकज कुमार कर्ण
सिर्फ तुम
Seema 'Tu haina'
बाबा साहेब जन्मोत्सव
Mahender Singh Hans
ऐसे थे पापा मेरे !
Kuldeep mishra (KD)
याद तेरी फिर आई है
Anamika Singh
तपों की बारिश (समसामयिक नवगीत)
ईश्वर दयाल गोस्वामी
पितृ स्वरूपा,हे विधाता..!
मनोज कर्ण
बेरूखी
Anamika Singh
पिता का पता
श्री रमण 'श्रीपद्'
इश्क़ में जूतियों का भी रहता है डर
आकाश महेशपुरी
"हैप्पी बर्थडे हिन्दी"
पंकज कुमार कर्ण
मिट्टी की कीमत
निकेश कुमार ठाकुर
हम भूल तो नहीं सकते
Dr fauzia Naseem shad
काफ़िर का ईमाँ
DEVSHREE PAREEK 'ARPITA'
आज तन्हा है हर कोई
Anamika Singh
"अष्टांग योग"
पंकज कुमार कर्ण
✍️अकेले रह गये ✍️
Vaishnavi Gupta
गुलामी के पदचिन्ह
मनोज कर्ण
अपनी नज़र में खुद अच्छा
Dr fauzia Naseem shad
ग़रीब की दिवाली!
महावीर उत्तरांचली • Mahavir Uttranchali
सत्यमंथन
मनोज कर्ण
कन्यादान क्यों और किसलिए [भाग१]
Anamika Singh
✍️गलतफहमियां ✍️
Vaishnavi Gupta
बारिश की बौछार
Shriyansh Gupta
ख़्वाब सारे तो
Dr fauzia Naseem shad
उस पथ पर ले चलो।
Buddha Prakash
मर्यादा का चीर / (नवगीत)
ईश्वर दयाल गोस्वामी
एक कतरा मोहब्बत
श्री रमण 'श्रीपद्'
Loading...