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हो गुरुजी मनै ऐसा ज्ञान सिखादे, कोए गावणिया हे गादे..!!टेक!!

होनहार कवि ललित कुमार की फुटकड रचनाये @संकलकर्ता-सन्दीप कौशिक-लोहारी जाटू-भिवानी

*प्रश्न रागनी*

हो गुरुजी मनै ऐसा ज्ञान सिखादे, कोए गावणिया हे गादे..!!टेक!!

बेमाता की मात बतादे सास बतादे गौरा की,
शिव शंकर का गुरू बतादे फिर बात करुगा औरा की,
अष्ट भुजा किस की पुत्री थी जीसनै करी सहायता चोरा की,
उस साधु का नाम बता जिन्है करी सवारी मोरा की,
हो जो पानी म्य आग लगादे कोए गावनिया हे गादे..!!१!!

बाप के विवाह मैं बणयां बिचौला वो लडका कित तै आया,
कर राक्षस का भेष देवता कुणसे युग मैं जिमण आया,
अन्न धन के भण्डार भरे थे छिकया नही भूखा ठाया,
जग परलो मैं कसर कड़ै जब पीवण नै ना जल पाया,
हो जो बेल धरम की लादे कोए गावनिया हे गादे..!!२!!

उस लडके का नाम बतादे जो ना माता कै पेट पड़या,
मात-पिता ना संग के साथी बेमाता नै नही घड़या,
जन्म होते ही करी लडाई ना कोए सन्मुख होया खड्या,
जय-जयकार होण लगी जग मैं देवलोक मैं जिकर छिड्या,
हो मेरे मन का भर्म मिटादे कोए गावनिया हे गादे..!!३!!

अपने मन तैँ प्राण त्याग कै फिर लडकी का चोला पाया,
होई सवासण पडी जरूरत पति मोह कै नै विवाह करवाया,
उस लडकी का नाम बता जिसनै एक पल मैं पुत्र जाया,
पति की सेवा करण लागगी पुत्र का सिर तरवाया,
हो श्री लखमीचनद नै समझादे कोए गावनिया हे गादे..!!४!!

*उत्तर रागनी*

हो गुरू न ऐसा ज्ञान सिखाया, मन्नै खोल सभा म्य गाया..!!टेक!!

बेमाता की मात गायत्री, अनसुईया सास गौरां की
शिव शंकर का गुरु अंगीरा ईब बात करू मैं औरां की
अष्ठभुजी थी ब्रहमा की पुत्री जिसने करी सहायता चोरां की
बालक नाथ थे ऐसे साधु जिसने करी सवारी मोरां की
ज्ञान से जा बाग आग मै लाया, मन्नै खोल सभा मैं गाया..!!१!!

बाप के ब्याह मैं भिष्म बिचोला वो देवलोक तै चलकै आया
कर राक्षस का भेष गणेश सतयुग मैं जिमण आया
ओड़े अन्न देवता की हार होई वो छिक्या नहीं भुखा ठाया
जल प्रल्य मैं जिव रहया ना जल भी मरता फिरे तिसाया
हो ऐसा पेड़ धर्म का लाया, मन्नै खोल सभा मं गाया..!!२!!

उस लड़के का नाम गणेश जो ना माता के पेट पड़या
गौरां माँ नै करी घड़ाई बेमाता नै नहीं घड़या
जन्म होवते करी लड़ाई ना कोई सन्मुख होया खड़या
शिव सैना भी हरा देई उसने न्युं देवलोक मैं जिकर छिड़या
जिसने 6 -4 का ज्ञान उनकी हो जाती शुद्ध काया..!!३!!

मिण्डकी नै जब त्यागे प्राण उसका कार्ज सिद्ध होग्या
मन्दोदरी रुप मै जन्म लिया फंस मोह मैं रावण मद होग्या
उसने जबरण ठाई दहाड़ लगाई एक पल मैं अंगद होग्या
वा रण क्षेत्र मैं नाटी थी कटया शीश पुत्र का वध होग्या
लिया जगदीश गुरु पै ज्ञान ललित नै पुरा भेद बताया..!!४!!

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