हिंदी

“हिंदी”

विश्व में अद्वितीय है हिंदी
अभिव्यक्त का सागर है हिंदी
सबकुछ परिभाषित है इसमें
हर रिश्ते की मिठास है हिंदी

मेरे हृदय में बसी है हिंदी
मेरी शिराओं में बसी है हिंदी
मेरे देश के माथे की बिन्दी
मेरे देश की राष्ट्रभाषा है हिंदी

मेरा स्वाभिमान है हिंदी
मेरा आत्मसम्मान है हिंदी
परिचय कराया संसार से
मेरी पहचान है हिंदी ।

आमजन की भाषा है हिंदी
आमजन का आधार है हिंदी
एक दूजे से जुड़ने का साधन है
आमजन का गर्व है हिंदी

” सन्दीप कुमार “

6 Comments · 235 Views
You may also like:
राब्ता
सिद्धार्थ गोरखपुरी
विश्व पृथ्वी दिवस
Dr Archana Gupta
*माँ छिन्नमस्तिका 【कुंडलिया】*
Ravi Prakash
तुम बिन लगता नही मेरा मन है
Ram Krishan Rastogi
हवलदार का करिया रंग (हास्य कविता)
दुष्यन्त 'बाबा'
कारस्तानी
Alok Saxena
रोग ने कितना अकेला कर दिया
Dr Archana Gupta
यह तो वक़्त ही बतायेगा
gurudeenverma198
जब बेटा पिता पे सवाल उठाता हैं
Nitu Sah
हायकु मुक्तक-पिता
डॉ प्रवीण कुमार श्रीवास्तव, प्रेम
खुशबू चमन की किसको अच्छी नहीं लगती।
Taj Mohammad
पिता की छाँव...
मनोज कर्ण
ब्रेक अप
डॉ प्रवीण कुमार श्रीवास्तव, प्रेम
"ईद"
Lohit Tamta
किसको बुरा कहें यहाँ अच्छा किसे कहें
Dr Archana Gupta
दिल और गुलाब
Vikas Sharma'Shivaaya'
फरियाद
Anamika Singh
परिवर्तन की राह पकड़ो ।
Buddha Prakash
तेरे रोने की आहट उसको भी सोने नहीं देती होगी
Krishan Singh
जैवविविधता नहीं मिटाओ, बन्धु अब तो होश में आओ
सुरेश कुमार चतुर्वेदी
हमारे जीवन में "पिता" का साया
इंजी. लोकेश शर्मा (लेखक)
खेत
Buddha Prakash
तुम हो
Alok Saxena
"मेरे पापा "
Usha Sharma
चार काँधे हों मयस्सर......
अश्क चिरैयाकोटी
हिन्दी साहित्य का फेसबुकिया काल
मनोज कर्ण
स्वप्न-साकार
Prabhudayal Raniwal
* तुम्हारा ऐहसास *
Dr. Alpa H.
महापंडित ठाकुर टीकाराम (18वीं सदीमे वैद्यनाथ मंदिर के प्रधान पुरोहित)
श्रीहर्ष आचार्य
प्रकाशित हो मिल गया, स्वाधीनता के घाम से
Pt. Brajesh Kumar Nayak
Loading...