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Apr 28, 2017 · 1 min read

हिंदी

हिंदी मेरा हृदय और तन भारत वर्ष पियारा है|
देश-प्रेम की पृष्ठभूमि पर जीना धर्म हमारा है|

गुजराती, पंजाबी, सिंधी ,बुंदेली, श्रंगार अपुन|
राग नशा को त्याग पूर्वी हो हिमगिरी उद्गार-सु धुन|
नहीं किसी से बैर, कूकती कोयल से मन हारा है|
देश-प्रेम की पृष्ठभूमि पर जीना धर्म हमारा है|

जाग विवेकानंद बनो औ हिंद देश का मान करो|
मातृभूमि के सजग सिपाही सदृश राष्ट्र में प्राण भरो |
सदा बने सद्ज्ञान -सु चोटी, मेटा उर- अँधियारा है|
देश- प्रेम की पृष्ठभूमि पर जीना धर्म हमारा है|

द्वंद रहे ना कोई सीखो, रचना प्रेम पुकार रही |
जन-जन की हिय- नायक बनकर हिंदी बहुत उदार रही|
सब मिल बोलो जय भारत माँ, हिंद प्रीति-गुरुद्वारा है|
देश -प्रेम की पृष्ठभूमि पर जीना धर्म हमारा है|
………………………………………………

बृजेश कुमार नायक
28-04-2017

●उक्त रचना को “जागा हिंदुस्तान चाहिए” काव्य संग्रह के द्वितीय संस्करण के अनुसार परिष्कृत कर दिया गया है।
●जागा हिंदुस्तान चाहिए काव्य संग्रह का द्वितीय संस्करण अमेजोन और फ्लिपकार्ट पर उपलब्ध है।
पं बृजेश कुमार नायक

1 Like · 1 Comment · 628 Views
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