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हिंदी में ‘नोबेल पुरस्कार’ क्यों नहीं ?

साल 2020 में साहित्य का नोबेल पुरस्कार एक कवयित्री को। अमेरिकी कवयित्री 77 वर्षीया लुइस ग्लक को 2020 के लिए साहित्य का नोबेल पुरस्कार देने की घोषणा हुई है। महिला साहित्यकारों के प्रसंगश: 2018 के लिए साहित्य का नोबेल पुरस्कार पोलैंड की लेखिका सुश्री ओल्गा तोकार्ज़ुक को दी गई थी और वहीं 2019 के लिए ऑस्ट्रिया के लेखक श्री पीटर हैंडके को दिए गए। लुइस पेशे से प्रोफेसर हैं और समकालीन कविताओं में उनकी अद्भुत पकड़ है।

हिंदी भाषा या अन्य भारतीय भाषाएँ ‘नोबेल’ की सूची में नहीं है, वो अंग्रेजी साहित्य को ही दी जाती है । अगर किसी की रचना अंग्रेजी में अनूदित होकर विश्वस्तर पर छा रही है, तो इस शर्तिया ध्यान दिया जाता है कि यथोक्त वर्ष वह लेखक व कवि ‘नोबेल’ के लिए नॉमिनेट हो !

यह नॉमिनेशन स्वीडिश अकादेमी के मेंबर्स करते हैं अथवा पूर्व के उस विधा के नोबेल पुरस्कार विजेता ! गुरुदेव रवीन्द्रनाथ ठाकुर की रचना अंग्रेजी में अनूदित होकर वहाँ तक पहुँची थी, तो हाल के वर्षों में स्व. महाश्वेता देवी, स्व. गिरीश कर्नाड, स्व. विजयदान देथा आदि भी अनूदित होकर ही वहाँ पहुँचे थे।

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