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26 May 2022 · 1 min read

हर सिम्त यहाँ…

हर सिम्त यहाँ आज ये क्या देख रहा हूँ,
मेयार लियाक़त का घटा देख रहा हूँ,
अब ‘अश्क’ निदामत के न आँखों में किसी के-
तहज़ीब का ये रूप नया देख रहा हूँ।।

©अश्क चिरैयाकोटी

Language: Hindi
Tag: मुक्तक
2 Likes · 124 Views
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