हरिगीतिका छन्द

हरिगीतिका छन्द
॰ ॰ ॰ ॰ ॰
बलवान है सुनिए वही जो, सोच का धनवान हो।
जिसको झुका दुनिया न पाये, फर्ज की पहचान हो।
वो धैर्य भी अपना न खोये, जो कभी अपमान हो।
कुछ शान मेँ इतरा न जाये, या कभी सम्मान हो।

– आकाश महेशपुरी

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