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Jun 15, 2022 · 1 min read

हम हैं

हम हैं गुलाम ए मुस्तफा दुनिया फिजूल है।
गुस्ताख़ ए मुस्तफा मेरे क़दमो की धूल है।
अजमत रसूले पाक की,है दिल में इस तरह।
नामुसे रिसालत पर जान देना कुबूल है।

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