Sep 11, 2016 · 1 min read

हमसे कभी जब बात वो दो चार करेंगे

हमसे कभी जब बात वो दो चार करेंगे
हम प्यार का अपने तभी इजहार करेंगे

नफरत से भरी ज़िन्दगी सुनसान बहुत है
हम फूल खिला प्यार के गुलज़ार करेंगे

तुम आज़मा के देख कभी लेना हमें भी
हम दोस्ती में जान भी कुर्बान करेंगे

चाहें लगा लो प्यार पे पाबंदियां कितनी
हम हार नहीं प्यार की स्वीकार करेंगे

हो जाएगा तब ‘अर्चना’ कद और भी ऊँचा
जब खत्म हम अपना ये अहंकार करेंगे

डॉ अर्चना गुप्ता

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