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हजार हैं

ऐ जिंदगी तुझसे मेरी शिकायतें हजार हैं।
वैसे तो इस जहान में रवायतें हजार हैं।
गर कर सकती है तो कर सही साबित मुझे क्योंकि,
मुझे गलत ठहराने की सियासतें हजार हैं।
-सिद्धार्थ पाण्डेय

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