Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Write
Notifications
Wall of Fame

स्वर कटुक हैं / (नवगीत)

:: स्वर कटुक हैं ::
———————

स्वर कटुक हैं
आरती के
औ’ अजानों के ।

खुल गई हैं
फिर दुकानें
यज्ञ, हवनों औ’कथा कीं ।
प्रार्थना,अर-
दास, पूजा
औ’ नमाज़ों कीं, दुआ कीं ।

मूल्य घटते
जा रहे
पावन बयानों के ।

तर्क देकर
पाप छिपते
और छिपतीं वासनाएँ ।
अर्थ-लिप्सा
अंध भक्ति
रच रहीं जैसे ऋचाएँ ।

पैर विचलित
ध्यान के भी
कुछ ठिकानों के ।

मौलवी हैं,
पादरी हैं
और हैं पण्डे बहुत से ।
कर्म त्यागे
धर्म के ही
डालते डण्डे बहुत से ।

पाठ नकली
कर रहे
फिर से पुरानों के ।

स्वर कटुक हैं,
आरती के
औ’ अजानों के ।

— ईश्वर दयाल गोस्वामी
छिरारी (रहली),सागर
मध्यप्रदेश ।

7 Likes · 10 Comments · 63 Views
You may also like:
सारे ही चेहरे कातिल हैं।
Taj Mohammad
✍️हार और जित✍️
"अशांत" शेखर
मायका
Anamika Singh
इश्क ए उल्फत।
Taj Mohammad
बद्दुआ बन गए है।
Taj Mohammad
नहीं चाहता
सिद्धार्थ गोरखपुरी
बालू का पसीना "
Dr Meenu Poonia
हम हर गम छुपा लेते हैं।
Taj Mohammad
बेसहारा हुए हैं।
Taj Mohammad
पिता का सपना
Prabhudayal Raniwal
स्वर्गीय श्री पुष्पेंद्र वर्णवाल जी का एक पत्र : मधुर...
Ravi Prakash
मुक्तक
Ranjeet Kumar
तुम जिंदगी जीते हो।
Taj Mohammad
मां शारदे
मनमोहन लाल गुप्ता अंजुम
ग़ज़ल
Dr.SAGHEER AHMAD SIDDIQUI
लाचार बूढ़ा बाप
jaswant Lakhara
कुएं का पानी की कहानी | Water In The Well...
harpreet.kaur19171
स्वादिष्ट खीर
Buddha Prakash
मन्नू जी की स्मृति में दोहे (श्रद्धा सुमन)
महावीर उत्तरांचली • Mahavir Uttranchali
बद्दुआ।
Taj Mohammad
परेशां हूं बहुत।
Taj Mohammad
✍️वास्तविकता✍️
"अशांत" शेखर
दिए जो गम तूने, उन्हे अब भुलाना पड़ेगा
Ram Krishan Rastogi
* जिंदगी हैं हसीन सौगात *
Dr. Alpa H. Amin
बुलबुला
मनोज शर्मा
नवगीत -
Mahendra Narayan
ग़ज़ल
Mahendra Narayan
पितृ स्वरूपा,हे विधाता..!
मनोज कर्ण
पीला पड़ा लाल तरबूज़ / (गर्मी का गीत)
ईश्वर दयाल गोस्वामी
*ससुराला : ( काव्य ) वसंत जमशेदपुरी*
Ravi Prakash
Loading...