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Jan 4, 2022 · 2 min read

स्वर्गीय श्री पुष्पेंद्र वर्णवाल जी का एक पत्र : मधुर स्मृति

*स्वर्गीय श्री पुष्पेंद्र वर्णवाल जी का एक पत्र : मधुर स्मृति*
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*लेखक : रवि प्रकाश ,बाजार सर्राफा*
*रामपुर (उ. प्र.)मोबाइल 9997615451*
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पुष्पेंद्र वर्णवाल जी का 4 जनवरी 2019 शुक्रवार को निधन हो गया। वह 72 वर्ष के थे और मेरा उनसे केवल डेढ़ महीने पुराना परिचय था । व्हाट्सएप के “साहित्यिक मुरादाबाद” ग्रुप में मैंने ऋग्वेद के तीसरे मंडल के 17वें सूक्त के तीसरे मंत्र पर चर्चा की थी , जिसमें 300 वर्ष की आयु मनुष्य किस प्रकार प्राप्त कर सकता है इसका साधन बताया गया था।
पुष्पेंद्र वर्णवाल जी का अगले ही दिन 18 नवंबर को एक पत्र “साहित्यिक मुरादाबाद” में प्रकाशित हुआ , जिसमें उन्होंने ऋग्वेद पर मेरी चर्चा को अपनी पुष्टि और समर्थन प्रदान किया था । अहा ! पत्र कितना सुंदर और सुगठित था । एक – एक शब्द चुन- चुन कर जैसे माला में पिरोया गया हो।
जीवन के प्रति गहरा आशावादी दृष्टिकोण, रोग से पीड़ित होते हुए भी 120 वर्ष जीवित रहने की दृढ़ इच्छाशक्ति और केवल 300 वर्ष नहीं अपितु पुष्पेंद्र जी की यह अपनी व्याख्या थी कि मनुष्य 360 वर्ष तक जीवित रह सकता है । मेरा ह्रदय उनके इस पत्र को पढ़कर श्रद्धा से उनके प्रति नतमस्तक हो गया। गहरी आत्मीयता का बोध हुआ। सोचा, शायद कभी इस महापुरुष से दर्शन करने और मिलने का सौभाग्य मिलेगा… वह आज इस संसार में नहीं हैं, लेकिन यादों का खजाना छोड़ गए। कभी- कभी छोटी- सी मुलाकात जीवन को बहुत गहरे प्रभावित कर जाती है। एक छोटे से पत्र में गागर में सागर भरा हुआ था।… हृदय से हृदय मिला …आत्मा से आत्मा मिली और एकाकार हो गए …उनको मेरी हृदय से श्रद्धांजलि
आपका पत्र इस प्रकार था :-
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प्रिय रवि प्रकाश, सुखद प्रभात, मैंने 72 पार कर लिये हैं, 5 जनवरी 2008 से असाध्य रोगी भी हूं, पर 120 वर्ष तक तो जीना ही जीना है, 120 वर्ष पूरे होने पर आगे भी जीवित रहने पर विचार करूंगा! परमात्मा ने सृष्टि नष्ट करने के लिये नहीं बनायी है, हर मानव को दीर्घायु व्यतीत करने का अधिकार है! कम से कम 360 वर्ष तो हर व्यक्ति आसानी से जीवित रह ही सकता है! 1974 से वेद की मन्त्र संहिताओं का निरन्तर अध्ययन चल रहा है! 140 वर्ष से अधिक आयु के रामानन्द अवधूत और 113 वर्ष तक जीवित रहे चतुर्भुज दास के साथ हिमालय में सन्तो की घाटी में रहा हूं ! साहित्य में भी अमिट हस्ताक्षर हूं! आत्म विश्वासी, रूढीवादी, परम्परा में आस्थावान्, सकारात्मक सोच, कर्मशील, सत्यनिष्ठ, स्वाध्यायी, राजयोगी हूं, ढिंढोरा तो नहीं पीटता, पर तुमने ऋग्वेद 3/17/3 की चर्चा की है, तो पुष्टि और समर्थन दे रहा हूं ! इसे मेरा बड़बोलापन मत समझ लेना ! यह एक कटु सत्य है ! मेरा दृढ़ निश्चय है, पूर्ण विश्वास है, कि हर व्यक्ति 360 वर्ष तक तो आसानी से जीवित रह ही सकता है ! पुष्पेन्द्र वर्णवाल का स्नेह ! मुरादाबाद में एक असाध्य रोगी, आजीवन हिन्दी सेवी ।

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