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10 Oct 2021 · 1 min read

🙏स्कंदमाता🙏

‘स्कंदमाता’
****🙏****

‘नवदुर्गा’ के पंचमरूपी , हे ‘देवमाता’;
कहलाती हो तुम ही , मां ‘स्कंदमाता’;
हे जन्मदात्री, तुम तो अच्छी माता हो;
शक्तिशाली सुपुत्र,श्री स्कंदकुमार की;
आदर्श बनी है तू मां,पुत्र के प्यार की;
तुम ही कहलाती, कार्तिकेय की मैया;
हे ‘परमेश्वरी’, तू सारे जग की खेवैया;
तेरा वर्ण पूर्णतः शुभ्र है, भुजा हैं चार;
भक्तों को कराती तू , भव-सागर पार;
दो हाथ तेरे, कमलपुष्प हैं सुसज्जित;
बायें हाथ ऊपर की, तू वर मुद्रा धारी;
एक हाथ से गोद में, प्रियपुत्र संभाली;
हे पद्मासन,आसन हैं तेरे पुष्प कमल;
तेरी उपासना, हर मन को करे विमल;
भक्तों ने, सच्चे दिल से तुझे पहचाना;
बुद्धि व ज्ञान की तुम है देवी, हे ज्ञाना;
विशुद्ध चैतन्य हेतु, भक्त करे आह्वान;
विचरती तू जग में, सिंह है तेरा वाहन;
हे ‘जगजननी’, तेरी सदा ही ‘जय हो’;
तेरी आराधना से , सारे ही सच्चे भक्त;
अत्यधिक तेज व सदा , कांतिमय हो;
हे सूर्यमंडल की ‘अधिष्ठात्री’, ‘प्रत्यक्षा’;
तुझसे ही तो,ये जग व सारा संसार है;
मां तू ही,अपने भक्तों का खेवनहार है;
सब भक्तजन मिलकर, धरे तेरा ध्यान;
हे स्कंदमाता, तुझको शत-शत प्रणाम।
*************🙏**************

स्वरचित सह मौलिक;
……✍️पंकज ‘कर्ण’
…………..कटिहार।।
तिथि:१०/१०/२०२१

Language: Hindi
Tag: कविता
5 Likes · 4 Comments · 641 Views
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