Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Write
Notifications
Settings
Jun 10, 2016 · 1 min read

सोचकर देखो

युग बदल रहा है तुम भी जरा बदल कर देखो मोह-माया से दूर कहीं सीधे चलकर देखो !

वक्त का सुरुर बहुत कुछ है कहता यहाँ , मंज़िल है कहाँ तुम बस ये सोच कर देखो !

आयेगा वक्त इस कदर तुम्हारा भी कभी, बडे हो गये हो ज़रा बडा सोचकर देखो !

मिलेगा यहाँ फरिश्ते की तरह कोई, अब की बार भरोसा करके तो देखो !

खुदा ने भेजा है तुम्हे किसी अच्छे के लिये यहाँ , इस कदर कभी खुद को समझकर तो देखो !

आस्था भी निराधार भक्ति भी जरुरी यहाँ, सयंम कभी तो कभी खुद को शांत करके तो देखो !

बदल गया यहाँ बहुत कुछ यहाँ, खुद को भरी नींद से जगा कर तो देखो !

.. ..बृज

1 Like · 2 Comments · 330 Views
You may also like:
एक कतरा मोहब्बत
श्री रमण 'श्रीपद्'
यादों की बारिश का कोई
Dr fauzia Naseem shad
इंतज़ार थमा
Dr fauzia Naseem shad
देव शयनी एकादशी
सुरेश कुमार चतुर्वेदी
क्या मेरी कलाई सूनी रहेगी ?
Kumar Anu Ojha
✍️आज के युवा ✍️
Vaishnavi Gupta
ये शिक्षामित्र है भाई कि इसमें जान थोड़ी है
आकाश महेशपुरी
✍️इतने महान नही ✍️
Vaishnavi Gupta
मन
शेख़ जाफ़र खान
हमसे न अब करो
Dr fauzia Naseem shad
जो दिल ओ ज़ेहन में
Dr fauzia Naseem shad
नित नए संघर्ष करो (मजदूर दिवस)
श्री रमण 'श्रीपद्'
पिता आदर्श नायक हमारे
Buddha Prakash
✍️वो इंसा ही क्या ✍️
Vaishnavi Gupta
परिवाद झगड़े
ईश्वर दयाल गोस्वामी
झुलसता पर्यावरण / (नवगीत)
ईश्वर दयाल गोस्वामी
जब चलती पुरवइया बयार
श्री रमण 'श्रीपद्'
ठोकरों ने समझाया
Anamika Singh
समय का सदुपयोग
Anamika Singh
हमें अब राम के पदचिन्ह पर चलकर दिखाना है
Dr Archana Gupta
मोहब्बत की दर्द- ए- दास्ताँ
साहित्य लेखन- एहसास और जज़्बात
माँ की भोर / (नवगीत)
ईश्वर दयाल गोस्वामी
अपनी आदत में
Dr fauzia Naseem shad
"शौर्यम..दक्षम..युध्धेय, बलिदान परम धर्मा" अर्थात- बहादुरी वह है जो आपको...
Lohit Tamta
इंसानियत का एहसास भी
Dr fauzia Naseem shad
बरसात आई झूम के...
Buddha Prakash
✍️अकेले रह गये ✍️
Vaishnavi Gupta
"कल्पनाओं का बादल"
Ajit Kumar "Karn"
हायकु मुक्तक-पिता
डॉ प्रवीण कुमार श्रीवास्तव, प्रेम
संघर्ष
Sushil chauhan
Loading...