Oct 6, 2016 · 1 min read

सॅंभले मानव जाति…कुण्डलिया

ईश्वर से प्रतिभा मिले, सत्संगति से ख्याति.
अहंकार उपजे स्वयं, सॅंभले मानव जाति..
सॅंभले मानव जाति, सत्य जीवन का जाने.
हो विनम्र दे स्नेह, शत्रु इसको ही माने.
अम्बरीष हों मित्र, प्रकृति प्राणी नभ तरुवर.
जुड़ें तार से तार, मिलें पल-पल में ईश्वर..

–इंजी० अम्बरीष श्रीवास्तव ‘अम्बर’

90 Views
You may also like:
श्रीराम गाथा
मनोज कर्ण
तुम्हीं हो मां
Krishan Singh
"साहिल"
Dr. Alpa H.
बेकार ही रंग लिए।
Taj Mohammad
डर कर लक्ष्य कोई पाता नहीं है ।
Buddha Prakash
# मां ...
Chinta netam मन
*हास्य-रस के पर्याय हुल्लड़ मुरादाबादी के काव्य में व्यंग्यात्मक चेतना*
Ravi Prakash
चिंता और चिता
VINOD KUMAR CHAUHAN
* अदृश्य ऊर्जा *
Dr. Alpa H.
मैं
Saraswati Bajpai
बुआ आई
राजेश 'ललित'
इलाहाबाद आयें हैं , इलाहाबाद आये हैं.....अज़ल
लवकुश यादव "अज़ल"
दिल से निकले हुए कुछ मुक्तक
Ram Krishan Rastogi
राष्ट्रवाद का रंग
मनोज कर्ण
स्मृति चिन्ह
Shyam Sundar Subramanian
श्रीराम धरा पर आए थे
सिद्धार्थ गोरखपुरी
युद्ध सिर्फ प्रश्न खड़ा करता है [भाग२]
Anamika Singh
ऐ वतन!
Anamika Singh
तुम्हारे जन्मदिन पर
अंजनीत निज्जर
जो... तुम मुझ संग प्रीत करों...
Dr. Alpa H.
माँ दुर्गे!
Anamika Singh
समुंदर बेच देता है
आकाश महेशपुरी
ठंडे पड़ चुके ये रिश्ते।
Manisha Manjari
ख्वाब
Swami Ganganiya
💐 ग़ुरूर मिट जाएगा💐
DR ARUN KUMAR SHASTRI
भगवान सुनता क्यों नहीं ?
ओनिका सेतिया 'अनु '
मजदूर हूॅं साहब
Deepak Kohli
न कोई जगत से कलाकार जाता
आकाश महेशपुरी
प्रेम की साधना
डॉ प्रवीण कुमार श्रीवास्तव, प्रेम
हाल ए इश्क।
Taj Mohammad
Loading...