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सूरज का ताप

काफी बढ़ता जा रहा, है सूरज का ताप।
जाता है जो धूप में, फौरन जाता हॉफ।
फौरन जाता हॉफ, दोष देता है रवि को।
होता है सन्ताप, ताप चढ़ता है कवि को।
कह अचूक कविराय, छुट रही सबकी हाँफी।
कष्ट प्रदाता ताप मित्र होता है काफी।।

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