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#रुबाइयाँ

#रुबाइयाँ

जीवन में आराम नहीं है , फिर भी सबको प्यारा है।
संघर्ष किया जिसनें जितना , उतना इसे निखारा है।।
क़दम-क़दम पर मिले चुनौती , कठिन लगे पर हल होती;
शाम-सुबह का हमको लगता , सुंदर अगर नज़ारा है।।

सोच नयी लेकर आता है , हर मंज़र जो सजता है।
वक़्त एक चित्रकार बनके , अद्भुत रचना रचता है।।
अपना-अपना दृष्टिकोण है , कुछ देखने समझने का;
चाँद देखता है या कोई , दृष्टि दाग़ पर रखता है।।

जीवन समर वही जीते जो , शौर्य लिए ललकारे हैं।
सूर्य-चंद्र तुम्हीं बताओ कब ? राहु केतु से हारे हैं।।
रोकर जीना भी क्या जीना , इससे अच्छा बलिदानी;
हारा जिसने जीवन चाहे , जीते दिल तो सारे हैं।

#आर.एस.’प्रीतम’
#सर्वाधिकार सुरक्षित रुबाइयाँ

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