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Mar 12, 2022 · 1 min read

सुनसान राह

हम राही सुनसान पथ के
अविराम बढ़ते जाते -आगे
त्रुटि पंथ को छोड़ चले हम
कर्म पंथ के पथ पे चल पड़े ।

हम राही सुनसान पथ के
आघात खा -खाकर हम
गिरते पड़ते संभलते जाते
अपनी निर्दिष्ट की ओर हम ।

हम राही सुनसान पथ के
तनहा ही हम इस जहां में
न कोई रहता मेल हमेशा
अयुज ही जाते खलक से ।

हम राही सुनसान पथ के
कोई न अपना इस भव में
पढ़ाई-लिखाई, कॉपी-किता
यही विधुर, बस बंधु हमारा ।

अमरेश कुमार वर्मा
जवाहर नवोदय विद्यालय बेगूसराय, बिहार

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