Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
Jul 25, 2016 · 1 min read

सियासी दांव पेंच

फैला के नफ़रतें प्यार के पैगाम न आएंगे
लगा के आग दिलों मे भी आराम न आएंगे
*********************************
सेकते हो तुम अक्सर यूं ही सियासी रोटियाँ
हर दफ़ा ये दाव पेंच सियासी काम न आएंगे
*********************************
कपिल कुमार
25/07/2016

1 Comment · 271 Views
You may also like:
🥗फीका 💦 त्यौहार💥 (नाट्य रूपांतरण)
पाण्डेय चिदानन्द
दिलों से नफ़रतें सारी
Dr fauzia Naseem shad
अधुरा सपना
Anamika Singh
पिता हैं धरती का भगवान।
Vindhya Prakash Mishra
परिवाद झगड़े
ईश्वर दयाल गोस्वामी
'दुष्टों का नाश करें' (ओज - रस)
Vishnu Prasad 'panchotiya'
✍️रास्ता मंज़िल का✍️
Vaishnavi Gupta
बोझ
आकांक्षा राय
फूल और कली के बीच का संवाद (हास्य व्यंग्य)
Anamika Singh
✍️One liner quotes✍️
Vaishnavi Gupta
बाबूजी! आती याद
श्री रमण 'श्रीपद्'
गुरुजी!
Vishnu Prasad 'panchotiya'
टेढ़ी-मेढ़ी जलेबी
Buddha Prakash
पीला पड़ा लाल तरबूज़ / (गर्मी का गीत)
ईश्वर दयाल गोस्वामी
रेलगाड़ी- ट्रेनगाड़ी
Buddha Prakash
ब्रेकिंग न्यूज़
सुरेन्द्र शर्मा 'शिव'
मिसाले हुस्न का
Dr fauzia Naseem shad
उलझनें_जिन्दगी की
मनोज कर्ण
पीयूष छंद-पिताजी का योगदान
asha0963
हवा-बतास
आकाश महेशपुरी
जागो राजू, जागो...
मनोज कर्ण
रावण का प्रश्न
Anamika Singh
यादों की बारिश का कोई
Dr fauzia Naseem shad
नींद खो दी
Dr fauzia Naseem shad
तुम हमें तन्हा कर गए
Anamika Singh
"भोर"
Ajit Kumar "Karn"
मैं हिन्दी हूँ , मैं हिन्दी हूँ / (हिन्दी दिवस...
ईश्वर दयाल गोस्वामी
✍️क्या सीखा ✍️
Vaishnavi Gupta
एक पनिहारिन की वेदना
Ram Krishan Rastogi
गरीबी पर लिखे अशआर
Dr fauzia Naseem shad
Loading...