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17 Jun 2016 · 1 min read

साकी सुरा पिला दे

साकी सुरा पिला दे,
सब गम मे’रे मिटा दे,

कर इस नशे से’ पागल,
खुद से मुझे मिला दे,

हैं आंख में बसा जो,
वो अक्स तू मिटा दे,

विरहन के’ शुष्क पल्लव,
तू बन हवा गिरा दे,

है प्यार सच का’ मेरा
उसका तू’ अब सिला दे,

पुष्प ठाकुर

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