सरहद–मुक्तक–डी के निवातियाँ

भायी न भाई को भाई की सूरत, बंटवारा कर डाला
जन्मे थे एक कोख में, लालच ने दुश्मन बना डाला
हमने तो सरहदे बनायी थी अमन-ओ-चैन के लिये
ज़ालिमो ने उसको भी मैदान-ऐ-कब्रगाह बना डाला !!

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डी के निवातियाँ________!!!

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