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Mar 25, 2019 · 4 min read

समस्या तू रंग बदलती है।

महान वैज्ञानिक अलबर्ट आइंस्टाइन का सिद्धांत है कि ऊर्जा ब्राह्मण में नष्ट नहीं होती है केवल उसका स्वरूप बदलता है।मैंने भी गहन विश्लेषण करके यह निष्कर्ष निकाला है कि समस्या समाप्त नहीं होती है केवल उसका स्वरूप बदलता है।और मैं इसे तर्क के साथ प्रमाण से सिद्ध भी कर सकता हूँ।तो आइए तर्क प्रमाण आपके सामने।
पहले घरों में कुएँ नहीं होते थे तो लोग बाहर से पानी लाते थे अब घरों में कुएँ होने लगे तो पानी निचे चला गया फिर कुएँ को और गहरा किया गया तब पानी मिला।कुछ दिनों बाद कुआँ सूख गया तो फिर बोरिंग कराया गया।उसके बाद बोरिंग का जल स्तर भी निचे चला गया तब टेप नल का जन्म हुआ पानी मिला अब अधिक कनेक्शन होने से टेप नल का पानी धीरे आने लगा क्योंकि अत्यधिक उपभोक्ता हो गए।उसके बाद लोग मशीन लगाने लगे फिर पानी आना बंद हो गया।किसी को मिलता किसी को नहीं मिलता तो टेप नल को और देर तक चलाने की मांग होने लगी देर तक चलाने के लिए बिजली की आवश्यकता लेकिन अब विद्युत आपूर्ति ने पुनः इसमें बाधा उत्पन्न करना प्रारंभ किया और समस्या का स्तर बदल गया, स्वरूप बदल गया।लेकिन समस्या समाप्त नहीं हुई।ठीक बोल रहा हूँ कि अभी भी प्रमाण चाहिए।
आज देश के हालात भी कुछ इसी तरह हैं एक समस्या समाप्त नहीं होती दूसरी जन्म ले लेती है।भारत को अगर समस्याओं का देश कहा जाए तो किचिंत मात्र भी आपको खेद या दुःख नहीं होना चाहिए।समस्या आदि काल से उपस्थित थी और आज हम लोगों के मध्य फल फूल रही है और भविष्य में इसका अद्भुत, अनुपम और विकराल विकास होगा।जैसा की हमारी सरकार का आदर्श नारा है”सबका साथ सबका विकास”फिर समस्या कैसे पिछे रह सकती है।
इस देश के दक्ष,निपुण,काबिल, अनुभवी,योग्य,जिम्मेदार, जवाबदार, सलाहकार, विशेषज्ञ समस्या को सुलझाने का पूरा पूरा प्रयास कर रहे हैं लेकिन समस्या का कोई बाल भी बांका नहीं कर पा रहा है।आप आम जनता हैं सरकार में अपना पूर्ण विश्वास रखना आपका नैतिक धर्म है और सरकार को मालूम है कि क्या उसका सर्वश्रेष्ठ कर्म है।बस आप निश्चिंत रहें अच्छे दिन आधे रास्ते में पहुंच गया है और कुछ दिनों में आपके सामने भी होगा तब आपकी आंखें खुली की खुली रह जायेंगी और आप भी जय जय कार करेंगे।
मैं समझता हूँ कि इस प्रकार की काल्पनिक बातों से समस्या का समाधान तो नहीं केवल मिथ्या भ्रम की स्थिति ही पैदा होगी और हाँ एक बात याद रखियेगा अच्छे दिन आयेंगे नहीं हम अपनी क्षमता और कर्मबल से अच्छे दिन लायेंगे यही हमारा मूल संकल्प होना चाहिए।
सरकार नहीं आपकी जिम्मेदारी है कि अपने अधिकारों को जाने, स्वयं लड़े और अपनी सुविधा चुनें।समस्या की जड़ सरकार नहीं आपके अंदर मृत पड़ा आत्मबल है जिस दिन ये जागृत हो जायेगा।सरकार क्या पूरे भारत वर्ष की आत्मा कांप जायेगी।आपने टीवी में विज्ञापन देखा होगा
जागो ग्राहक जागो
अपने अधिकारों के पिछे भागो
मेरा काम था आपको सूचित करना आपका नैतिक कर्तव्य है क्रियाशील होना, सक्रिय होना, सजग होना, जागृत होना, तत्पर होना और जागना अब ये मैं आप पर छोड़ देता हूँ।ए पी जे अब्दुल कलाम ने कहा है जो प्रतिक्षा करते हैं उन्हें केवल शेष ही प्राप्त होता है
अब आप जानिए कि आप आगे बढ़ेंगे की प्रतिक्षा करेंगे ये आप पर निर्भर है।मेरा एक सुक्षाव था कि आत्मनिर्भर बनें।दूसरों के कंधों पर बंदूक रख कर चलाने से कहीं अच्छा है अपना कंधा मजबूत बनाना।
आप सभी की जय हो
जय हिन्द
आपकी प्रतिक्रिया की प्रतिक्षा में ये प्रिय
अब जाग जाइए कृपा निधान
आप सुन रहे हैं मेरी जबान-ये आदित्य की ही कलम है श्रीमान
एक अत्यंत छोटी कविता आपके सामने

लोकतंत्र का बलात्कार तो रोज ही हो रहा है बस भेश बदल रहा है
और सब कहते हैं देश बदल रहा है
लोकतंत्र को लुटने वालों
सब अपने गिरेबान में नजर डालो
थूक के चाटने वालों
और चाट के थूकने वालों
भारत का मान मिट गया इस बात पर
जो आदमी आ गया अपनी औकात पर
समस्या ही समस्या चारो ओर नजर आती है
हर रोज लोकतंत्र की आत्मा जलायी जाती है
संदेह नहीं स्वाभिमान होना था
सब कुछ पाकर भी सब कुछ खोना था
मान, वैभव, यश सब अब क्षय हुआ जाता है
देखिए और विकास किस रथ पर सवार होकर आता है
तर्क से देश बाहर निकल नहीं रहा
और सत्य का पता कभी चल नहीं रहा
भारत को माँ कहते हो और माँ को नंगा करते हो
तुम ही सच्चे देशभक्त हो इस बात पर आपस में दंगा करते हो
तुम्हारी इसी हरकत से भारत माँ रोई है
और सबसे ज्यादा लज्जित होकर लोकतंत्र में सोई है

पूर्णतः मौलिक स्वरचित लेख सहित सृजन
आदित्य कुमार भारती
टेंगनमाड़ा, बिलासपुर, छ.ग.

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