Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Write
Notifications
Wall of Fame
#28 Trending Author

समंदर की चेतावनी

सागर हूं मैंने प्यार, रहने खाने तुम्हें दिया
नाना रत्न दे तुम्हें, मालामाल किया
बादलों को जल दें, अमृत वर्षा दिया
ताप सारा सोखकर, जहां रहने लायक किया
समंदर हूं मैंने, सब कुछ पचा लिया
बदले में तुमने मुझे, प्रदूषण से भर दिया
प्लास्टिक का कचरा,रसायन से भर दिया
मर रहे हैं मेरे जलीय जीव, नहीं आती तुम्हें दया
जल रहा है अंतस, मैं करूं अब क्या
सावधान मानव तू सावधान हो
अभी है वक्त अपना, अस्तित्व तू ना खो
बिगड़ गई गर सेहत, सीमाएं टूट जाएंगी
न तुम बचोगे न जीवन, धरा ये डूब जाएगी
बिगड़ जाएगा संतुलन, प्रलय धरा पर आएगी

सुरेश कुमार चतुर्वेदी

4 Likes · 3 Comments · 75 Views
You may also like:
मौत बाटे अटल
आकाश महेशपुरी
My Expressions
Shyam Sundar Subramanian
.✍️स्काई इज लिमिटच्या संकल्पना✍️
"अशांत" शेखर
वह खूब रोए।
Taj Mohammad
आज की नारी हूँ
Anamika Singh
सहारा
अरशद रसूल /Arshad Rasool
मंजिले जुस्तजू
Vikas Sharma'Shivaaya'
दीप तुम प्रज्वलित करते रहो।
Taj Mohammad
एक दिन तू भी।
Taj Mohammad
इश्क में तन्हाईयां बहुत है।
Taj Mohammad
परिंदों सा।
Taj Mohammad
वो हैं , छिपे हुए...
मनोज कर्ण
कांटों पर उगना सीखो
VINOD KUMAR CHAUHAN
दूल्हे अब बिकते हैं (एक व्यंग्य)
Ram Krishan Rastogi
अपराधी कौन
Manu Vashistha
फूल की महक
DESH RAJ
घृणित नजर
Dr Meenu Poonia
पर्यावरण पच्चीसी
मधुसूदन गौतम
"अंतरात्मा"
Dr. Alpa H. Amin
*** वीरता
Prabhavari Jha
तब मुझसे मत करना कोई सवाल तुम
gurudeenverma198
एक मुर्गी की दर्द भरी दास्तां
ओनिका सेतिया 'अनु '
✍️बेवफ़ा मोहब्बत✍️
"अशांत" शेखर
ऐसे थे पापा मेरे !
Kuldeep mishra (KD)
ऐ वक्त ठहर जा जरा सा
Sandeep Albela
ना चीज़ हो गया हूँ
सोलंकी प्रशांत (An Explorer Of Life)
पिता, पिता बने आकाश
indu parashar
श्रम पिता का समाया
शेख़ जाफ़र खान
पर्यावरण संरक्षण
Manu Vashistha
पिता - नीम की छाँव सा - डी के निवातिया
डी. के. निवातिया
Loading...