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8 Jul 2022 · 1 min read

सब अपने नसीबों का

कहने में क्या हर्ज है
कह लीजिए यह भी।
सब अपने नसीबो का
लिखा भोग रहे हैं ।।
कुछ तेरी कमी है
तो कुछ मेरी भी कमी है।
किस्तो में जो इस तरह
हम दम तोड़ रहें है ।।

डाॅ फौज़िया नसीम शाद

Language: Hindi
Tag: मुक्तक
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