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Jul 3, 2017 · 1 min read

सत् हंसवाहनी वर दे,

प्रार्थना
………….
सत् हंसवाहनी वर दे, सत् हंसवाहनी वर दे ।
समता-ममता के पीयूष से, नव भारत भर दे ।

अंतर्ज्ञान जगा दे मैया , कभी न रहूँ विकल मैं।
बना दूरदर्शी,कर दो शुभ-उज्जवल जीवन पल में ।
मेरे मन के सद् भक्ति-भाव को मृदु-अनंत कर दे ।
सत् हंस वाहिनी वर दे, सत् हंसवाहनी वर दे ।

आद्योपान्त सुज्ञान सजग आद्ध्यात्मिकसत्-वर्षा कर।
प्राणिमात्र में भी प्रसन्नता की संपूर्ण प्रभा भर ।
शुभ स्वर्ग-सदृश हो मृत्युलोक,सह दत्तचित्त कर दे ।
सत् हंसवाहनी वर दे, सत् हंसवाहनी वर दे ।

हर अगम्य नरपथ से उन्मूलन कुरीतियों का कर ।
वैज्ञानिक हो सोच, कर्म सब ठोस व वुद्धि प्रखरतर।
“नायक बृजेश ” राष्ट्रीय एकता के अखंड कर दे ।
सत् हंसवाहनी वर दे, सत् हंसवाहनी वर दे ।
…………………………………………………

●2013 में जे एम डी पब्लिकेशन से प्रकाशित मेरी कृति “जागा हिंदुस्तान चाहिए” की उक्त रचना को 2018 मे साहित्यपीडिया पब्लिसिंग से प्रकाशित जागा हिंदुस्तान चाहिए कृति के द्वितीय संस्करण के अनुसार परिष्कृत किया गया है।

● “जागा हिंदुस्तान चाहिए” कृति/काव्यसंग्रह
का द्वितीय संस्करण अमेजोन और फ्लिपकार्ट पर उपलब्ध है।

पं बृजेश कुमार नायक

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