Sep 19, 2016 · 1 min read

सजा दें

मुहब्बत दिखा जब किसी से फँसा है
कभी क्यों न उसको जरा सी सजा दें

दुखाया किसी का कभी दिल न तूने
दुआ को सभी की सदा ही फला दें

दिया साथ जो झूँठ का जब न तूने
सही बात से क्यों न परदा उठा दें

दिखा आयना जो लुभाया सभी को
वहीं प्यार तू सभी पर लुटा दें

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