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* सकल जगत में रमते दोनों *

श्याम श्याम रटते रहो दिन हो चाहे रात
श्याम श्याम ही को हरते जीवन में करते प्रकाश
राम नाम जपते रहो रमता सकल जहान
राम बिना सब सूना जग है ऐसा तूं ळे जान
राम कहो या श्याम कहो भजलो चाहे घनश्याम
सकल जगत में रमते दोनों करते सबका त्राण
भजले भजन करले तूं भव-सागर हो जाये पार
श्याम श्याम रटते रहो दिन हो चाहे रात ।।
?मधुप बैरागी

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