श्रेष्ट शिखर बिरजू छुए, अद्भुत था हर नृत्य

कत्थक केन्द्र सभी कहें, सच्चे साधक आप
नाचे सब दुःख भूलकर, मिटा हृदय सन्ताप

नृत्य छुए गहराइयाँ, टूटे घुँघरू पाँव
बरसों कठोर साधना, धूप बनी तब छाँव

श्रेष्ट शिखर बिरजू छुए, अद्भुत था हर नृत्य
हैं काल के कपाल पर, महाराज के कृत्य

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*कथक सम्राट बिरजू महाराज अर्थात पंडित बृजमोहन मिश्र नहीं रहे। वह 83 बरस के थे। कला के क्षेत्र में उनका योगदान ऐसा है कि आज विश्वभर में उन्हें जानने वाले कलाकार ही नहीं उनके करोड़ों प्रशंसक नम आंखों से श्रद्धा सुमन अर्पित कर रहे हैं…. सोशल मिडिया पर तो मानों बाढ़ ही आ गई है। कोई कह रहा है, “भारतीय संगीत का पैगमबर चला गया। तो कोई कवि कहता, आज मेरे गीतों की लय थम गई है। कोई गायक बोला, मेरे सुर मौन हो गए हैं मेरी आवाज़ चली गई है। कला की देवी के भाव शून्य हो गए। क्या सिनेमा वाले, क्या टीवी, थियेटर वाले सभी अपने-अपने तरीके से महाराज को याद कर रहे हैं। बतौर नर्तक व शास्त्रीय गायक बिरजू महाराज ने अनेक हिंदी फिल्मों में भी डांस व कोरियोग्राफी की थी। मात्र तेरह वर्ष की आयु से कला के क्षेत्र में उन्होंने जिस कथक से अपना आरम्भ किया उसे अपनी मृत्यु तक उसी गहराई से आसमान की ऊंचाई तक पहुँचाया। आखिरी साँस तक उनसे कथक की बारीकियाँ सीखने, जानने, अच्छी तरह समझने के अलावा मार्गदर्शन लेने, आशीर्वाद लेने, उनकी एक झलक पाने वालों का तांता तिरासी साल की उम्र में भी हमेशा लगा रहा। प्रस्तुत हैं मेरे चन्द दोहे उन्हें श्रद्धांजलि स्वरूप….

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