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13 Aug 2022 · 2 min read

*श्री शचींद्र भटनागर : एक अध्यात्मवादी गीतकार*

*श्री शचींद्र भटनागर : एक अध्यात्मवादी गीतकार*
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श्री शचींद्र भटनागर *(28 सितंबर 1935 – 1 फरवरी 2020)* मूलतः आध्यात्मिक प्रवृत्ति के शुचिता में विश्वास करने वाले तथा उच्च जीवन मूल्यों के साथ जीवन जीने वाले व्यक्ति रहे । मूलतः गीतकार रहे। *1973* में _खंड खंड चांदनी_ गीत संग्रह से आपने अपनी गीत-यात्रा आरंभ की और अंत तक कुछ गजलों और मुक्तकों को छोड़कर आपके गीत संग्रह ही सात्विक सुरभि बिखेरते रहे।
मुरादाबाद मंडल के *बहजोई इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य* पद को आप ने 1970 से 1995 तक सेवानिवृत्त होने तक सुशोभित किया । आप के गीतों का स्वर समाज को सार्थक दिशा देने वाला रहा । भारतीय संस्कृति का नाद आपके गीतों में गूॅंजा ।आपके कुछ गीतों के मुखड़े आपकी सात्विक-राष्ट्रीयतावादी विचारधारा को इंगित करने के लिए पर्याप्त हैं । उदाहरणार्थ:-

*(1) कैसे स्वस्थ रहेगी काया जब यह मन बीमार है*

*(2) घुस रहा है गॉंव के भीतर शहर, अब जाग जाओ*

*(3) नगरों ने जब निगल लिए हैं हरे-भरे जंगल/ फिर कैसे हो मनुज सुखी /हो कैसे जन-मंगल*

*(4) मेरी सुनो पुकार, बोलती हूॅं मैं गंगा माई*
आध्यात्मिक विचारधारा को आपने जीवन की सर्वोत्तम डगर के रूप में स्वीकार किया । केवल तन की भूमिका में न सिमटकर आपकी चेतना उस शाश्वत और सनातन की खोज के लिए प्रयत्नशील रही है, जो मनुष्य जीवन का सच्चा ध्येय है ।
आपके एक गीत में चयन के लिए इसी अध्यात्मवादी दृष्टिकोण का प्रतिपादन होता है। गीत इस प्रकार है :-

*इस तरफ हैं शिखर, उस तरफ खाइयाँ,*
*सोचना है कि किसका करें हम चयन*
*आज हम उस तिराहे खड़े हैं जहाँ,*
*सिर्फ दो मार्ग हैं, आमने-सामने,*
*एक अध्यात्म – उत्कर्ष का मार्ग है,*
*दूसरे में खड़ा नाश, कर थामने*
*सोच लें, जागकर, हम सृजनरत रहें,*
*या कि विध्वंस की गोद मे हो शयन*
कुल मिलाकर श्री शचींद्र भटनागर सच्चे, सरल भावुक हृदय में सादगी-सौम्य को बसाए हुए ऐसे व्यक्ति थे जिनकी रचनाऍं एक अच्छे समाज की रचना के लिए भी प्रेरित करेंगी और एक निर्मल मनुष्य के निर्माण का मार्ग भी प्रशस्त कर सकेंगी ।
कुछ लोग कविता को केवल मनोरंजन अथवा हास-परिहास का साधन समझते हैं जबकि दूसरे लोग गंभीरतापूर्वक कविता के माध्यम से व्यक्ति और समाज के बदलाव के लिए काम करते हैं। श्री शचींद्र भटनागर उन दूसरे प्रकार के मूल्यधर्मी रचनाकार थे। आपके लिए लेखन मनोरंजन नहीं था । यह जीवन की साधना थी । आप को शत-शत प्रणाम ।
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समीक्षक: रवि प्रकाश
बाजार सर्राफा
रामपुर उत्तर प्रदेश
मोबाइल 99976 15451

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