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11 Feb 2022 · 2 min read

श्री राधा मोहन चतुर्वेदी

2 अक्टूबर 2016 को श्री राम मोहन चतुर्वेदी द्वारा रामपुर में अपने पिता स्वर्गीय श्री राधा मोहन चतुर्वेदी जी की कविताओं का पाठ करने हेतु आभार- पत्र , जो उस समय पढ़ा गया था।
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आदरणीय श्री राम मोहन चतुर्वेदी जी
टैगोर शिशु निकेतन तथा राजकली देवी शैक्षिक पुस्तकालय के वार्षिकोत्सव के अवसर पर आपने पधारकर अपने पूज्य पिताजी रियासत- कालीन राजकवि स्वर्गीय श्री राधा मोहन चतुर्वेदी जी की कविताओं का पाठ किया, इसके लिए हम आपके अत्यंत आभारी हैं ।
स्वर्गीय श्री राधा मोहन चतुर्वेदी हिंदी साहित्य तथा आध्यात्मिक जगत के गौरव थे। रामपुर के तो वह अत्यंत प्रतिष्ठित तथा महान व्यक्तियों में अग्रणी थे । उनकी प्रतिभा तथा विद्वत्ता से प्रभावित होकर उनके अभिनंदन हेतु उन्हें रियासत के दौर में विशिष्ट आदर प्राप्त होता था तथा राजकवि के रूप में पर्याप्त सम्मान मिलता था।
वह ब्रजभाषा के श्रेष्ठ कवि थे ।काव्य में कलात्मकता उत्पन्न करने के लिए उसमें भाँति- भाँति से अनूठे प्रयोग करना उनकी विशिष्टता थी। उन्होंने ऐसी काव्य पंक्तियाँ लिखी थीं जो सीधी तथा उल्टी दोनों तरफ से एक जैसी पढ़ी जाती थीं। ऐसे छंद लिखे थे ,जिनकी पहली पंक्ति जहाँ से समाप्त होती थी अगली पंक्ति वहीं से शुरू होती थी। यह रसमय लयबद्ध कविताओं से आगे की चीज थी। आजकल जब अतुकांत कविताओं का काफी फैशन हो चला है, यह काव्यगत माथापच्ची विस्मय पैदा करती है।
राधा मोहन जी में क्रांतिकारी तथा स्वाधीनता संग्राम में भागीदारी की तेजस्विता थी । कोलकाता में व्यवसाय के संबंध में जब वहाँ जाकर रहे तो उन्होंने नवभारत छात्रोत्थान संघ की स्थापना की तथा छात्रों को शस्त्र सिखाने का कार्य किया। इसके प्रमाण बंगाली भाषा में तथा हिंदी भाषा में 1939 के आसपास के समाचार पत्रों की कटिंग में उपलब्ध हैं ,जिन्हें बहुत यत्न आपने( श्री राम मोहन जी ने) अभी तक सँभाल कर रखा है ।
स्वर्गीय कवि श्रेष्ठ आशु कवि थे। व्यक्तित्व सज्जनता से परिपूर्ण तथा प्रभावशाली था ।जब नवाब रजा अली खाँ रामपुर में गाँधी समाधि की स्थापना के लिए स्पेशल ट्रेन से गाँधीजी की चिता की भस्म लेने दिल्ली गए थे ,तो राधा मोहन जी भी उनके साथ थे ।
स्वर्गीय राधा मोहन जी की कथा वाचक के रूप में मधुर भूमिका का स्मरण आज भी नगर के बुजुर्ग करते हैं। स्वर्गीय बृजवासी लाल भाई साहब के निवास पर उनकी कथा रोजाना शाम को चलती थी। वह भक्ति- रस अनूठा था । कथा कहते समय राधा मोहन जी द्वारा गाई जाने वाली प्रिय कविता इस प्रकार है :-
मेरी लाज रघुराज के हाथ में है
धनुष – बाण जिनके वरद हाथ में है

न चिंता मुझे लोक- परलोक की है
अमित शक्ति श्री जानकी नाथ में है

यह कलिकाल क्या बाल बाँका करेगा
कृपा श्री कृपानाथ की साथ में है

अगोचर अगम ब्रह्म गोचर सुगम है
यह सामर्थ्य मोहन प्रनत माथ में है
रवि प्रकाश
अध्यक्षः रामप्रकाश सर्राफ मिशन, रामपुर
दिनांक 2 अक्टूबर 2016

Language: Hindi
Tag: संस्मरण
356 Views

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