Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
4 Sep 2022 · 4 min read

💐💐प्रेम की राह पर-62💐💐

शोध जितना ज्ञान का वाहक है उतना ही प्रतिशोध क्रोधाग्नि का वाहक।शोध में किसी व्यक्ति का चिन्तन सार्थक ही होगा।परन्तु प्रतिशोध में शत्रुता के अलावा कोई विशेष ज्ञान न होकर सार्थक न होगा।प्रतिशोध और शोध में कोई समता नहीं है।कोई विशेष रहस्य न छिपा है।शोध में स्वाध्याय की एक विशेष यात्रा तय की जाती है।एक विशेष का चिन्तन किया जाता है और वह भी एक ज्ञान की विविध पहेलियों के साथ।ज्ञान की पहेलियों को सुलझाते रहो स्वयं सुलझकर।प्रतिशोध में घोर शत्रुता और बदले की भावना के हिंसक उपहार शत्रु भोगेगा या फिर हिंसक संहार में स्वयं कुचले जा सकते हैं।नवीन कुछ न मिलेगा शोध जैसा।शोधरूपी तक्र से विलोडक रूपी स्वाध्याय छड़ी से निश्चित ही आप संकेतरूपी ज्ञान का मक्खन सेवन करेंगे।संकेतरूपी इसलिए क्योंकि वह एक नई दिशा का सृजन कर आपको उस क्षेत्र में पारंगत बनाएगा।शोध हमें सिखाता है कि वास्तविक रुप से शिक्षा का आशय धन कमाना नहीं है।जैसा कि वर्तमान समय में अधिक शिक्षित तो अधिक धन से तुलना की जाती है।शिक्षा का धन से कोई,साफ-साफ शब्दों में कह दूँ,कोई लेना-देना नहीं है।अगणित उदाहरण हैं इस जागतिक व्यापार में ऐसे महानुभावों के जिनका कलम से कोई लेना देना न रहा परन्तु धन की बहुत बड़ी पेटी के मालिक हैं।शिक्षा का सही अर्थ तो इस जीवनसरिता को स्वचिन्तन से शनैः शनैः पार करना है। प्रतिशोध में इतना ही अन्तर है।प्रतिशोध में कोई लावण्यता न टपकेगी।कोई कृपा न बरसेगी।कोई ऐसी बयार न चलेगी जो तुम्हे ज्ञान से अथवा प्रेम से भिगो दे।प्रतिशोध जीवनसरिता में आपको निश्चित डुबो देगा।प्रतिशोध व्यावहारिक नहीं है।शोध में सम्बंधित विषय की अतिरेक भावना गोपनीय होती है ।परन्तु प्रतिशोध में व्यतिरेक ही होता है।शोध के पक्ष को कुत्सित चिन्तन से निर्बन्ध करने के लिए स्वविचारों को प्रभूत ढंग से प्रस्तुत करना होगा।जब कि शोध साधुता को प्रकट करेगा।सुदृढ़ प्रेम को प्रकट करेगा।आप स्वयं वंचक न रहोगे किसी भी क्षेत्र में।जीवन के विविध उपहार ही मिलेंगे।संयुक्त बन जायेंगे आप स्वयं में।सत्य की छन्नी से छनकर आप से हर चीज़ टकराएगी।आप प्राचीन बनकर आधुनिक बने रहोगे।सांसारिक वस्तुएँ घेरेंगी तो सही आपको।वह धर लेंगी सात्विक रूप।उस रूप का वास्तविक चेहरा किसी भी दृष्टिकोण से अशुद्ध न होगा।शोध का आशय ऐसा है कि मुख्य शोध बिन्दु को संसार के सम्मुख लीक से हटकर कुछ नवीन कलेवरधारी देंवें।झूठ का प्रशय न हो।उदारता के भाव भरे हों।संकुचित कुछ न हो।संक्षिप्त में भी विस्तृत हो।ईश्वरवाद का पुट लगाया गया हो।ढोंग की संलिप्तता का लेशमात्र भी प्रयोग न हो।परन्तु इस शोध और प्रतिशोध से हमें क्या?हम तो हे रूपा! तटस्थ है।तुम गाओ अपने बेसुरे गीत।कोई काम भी तो नहीं है।एक अच्छी सीख भी तो न दे सके।पता नहीं वह जूता था या जूती।एक की परास मुझ तक थी।वह पदार्थ मेरे हिस्से में आ गया।परन्तु क्या तुम तब से एक के सहारे जी रहे हो।पता नहीं कितने शूल लगें होंगे।उस बिना जूते के पैर में।उसके हिस्से के अश्रु बहते होंगे।बाकी जीवन में अश्रु ही बचेंगे।रोते रहना।तुम से कुछ न हो सका जूते या जूती मारने के अलावा।तुम्हारे भाग का ही है यह सब।तो इसे स्वीकार करना।उत्साह से।हम क्यों रखेंगे?इसे अपने भाग में।कुछ तप भी कर लो एक पाद को नग्न रखो और दूसरे में पहनो जूते।कुछ न कुछ ग्लानि का भाव तो विकसित करो।याद रखना तुम्हारे पथ अवरुद्ध हो जायेंगे।कुछ न पा सकोगे अनमोल।यह संसार अछूत बना देगा।चित्त की प्रसन्नता छू हो जाएगी।कुछ भी मंगल न होगा।जोड़ते रहना उन तन्तुओं को जो कभी भी न जुड़ सकेंगें।जिद्दी हो तो क्या है?तीतर के पंख बचेंगे।करते रहना हवा सूखी गर्मी में उनसे।हम क्यों उपदेशक बने किसी के।तुम्हारे कर्म तुम्हारे हाथ और हमारे कर्म हमारे।हम क्यों जोड़े किसी से अपने भाव।अनावश्यक।ढोंगी लोग पढ़ते हुए फोटो डालते हैं।क्या जीवनभर पढ़ते रहोगे।कर कुछ न पाये।उस प्रेम को बना डाला अन्धड़।विशुद्ध प्रेम की वायु को अंधड बनाने का अधिकार किसी को नहीं है।तदा तुम्हारे द्वारा उस कुतर्क का वाचन असत्य की धरा पर क्यों किया गया?क्या मज़मून था।क्या कोई अंधा प्रयास था तुम्हारा।तो तुम्हें मिला क्या?इन धूर्तता भरी पगडंडियों पर अब न चलने का मन करता है और न किसी को चलाने का।सभी को चाहिए मोटी मछली।अन्धड़ कब आ जाये संकटों का।जीवन में और किसी के भी हिस्से में किसी को कुछ भी नहीं पता।तो तुम ईश्वर तो थे नहीं।किसी अपाहिज़ विचार उन में तमाम बेरुखापन सिवाय रुदन की आहट के कुछ न दे सका।जबाब तो देने होंगे सभी हित जनों को मेरे प्रति ईश्वर के समक्ष।हे चिसमिस तुम विशेष रूप से देना।कितने सरोकारी से अपना जीवन जी रहा था।वैसे भी अपने दम पर इंद्रप्रस्थ की ओर कूच किया।राक्षसों ने घेर ही लिया मुझे।उनके किये की लिखावट परमात्मा अपनी लाल किताब से कभी न मिटायेंगे।जब जब जन्म लेंगे।तब तब वह दण्ड का प्रसाद लेंगे।वह ढोंगी तो अंधा ब्रह्मराक्षस बनेगा।सदैव जकड़ा रहेगा जंजीरों से।कभी न उबर पायेगा वह धूर्त।मैं तो हनुमन्त सेवक हूँ और दो-दो महापुरुषों का प्रमाणपत्र है।मेरे पास।उस धूर्त के पास तो कुछ नहीं है।दुष्ट तुम्हें दण्ड बड़ी सादगी से मिलेगा।हे चिसमिस तुम न घबराना तुम्हें दण्ड मिलेगा तो अवश्य।पर वह होगा उपहार ही।उसमें शामिल होगी।चतुराई की चारुता।समझे रूपा।

©अभिषेक पाराशर

Language: Hindi
1 Like · 66 Views
You may also like:
हौंसला
हौंसला
Gaurav Sharma
"BETTER COMPANY"
DrLakshman Jha Parimal
ख्वाहिशों का अम्बार
ख्वाहिशों का अम्बार
Satish Srijan
होली का त्यौहार
होली का त्यौहार
Kavita Chouhan
और मैं बहरी हो गई
और मैं बहरी हो गई
Surinder blackpen
वक्त का लिहाज़
वक्त का लिहाज़
सुरेन्द्र शर्मा 'शिव'
कविता का जन्म
कविता का जन्म
Dr Rajiv
Tajposhi ki rasam  ho rhi hai
Tajposhi ki rasam ho rhi hai
Sakshi Tripathi
तेरे मेरे रिश्ते को मैं क्या नाम दूं।
तेरे मेरे रिश्ते को मैं क्या नाम दूं।
Taj Mohammad
एतबार उस पर इतना था
एतबार उस पर इतना था
Dr fauzia Naseem shad
बंधे धागे प्रेम के तो
बंधे धागे प्रेम के तो
shabina. Naaz
शुरुआत की देर है बस
शुरुआत की देर है बस
Buddha Prakash
ग़ज़ल
ग़ज़ल
आर.एस. 'प्रीतम'
ऐसे इश्क निभाया हमने
ऐसे इश्क निभाया हमने
Anamika Singh
संत गाडगे संदेश 2
संत गाडगे संदेश 2
Vijay kannauje
सर्दी का मौसम
सर्दी का मौसम
Ram Krishan Rastogi
"तब कैसा लगा होगा?"
Dr. Kishan tandon kranti
बाल कहानी- गणतंत्र दिवस
बाल कहानी- गणतंत्र दिवस
SHAMA PARVEEN
मंदिर दीप जले / (नवगीत)
मंदिर दीप जले / (नवगीत)
ईश्वर दयाल गोस्वामी
अपने पल्ले कुछ नहीं पड़ता
अपने पल्ले कुछ नहीं पड़ता
Shekhar Chandra Mitra
*मुर्गे का चढ़ावा( अतुकांत कविता)*
*मुर्गे का चढ़ावा( अतुकांत कविता)*
Ravi Prakash
मेरे 20 सर्वश्रेष्ठ दोहे
मेरे 20 सर्वश्रेष्ठ दोहे
महावीर उत्तरांचली • Mahavir Uttranchali
चाय सिर्फ चीनी और चायपत्ती का मेल नहीं
चाय सिर्फ चीनी और चायपत्ती का मेल नहीं
Charu Mitra
इश्क
इश्क
नंदलाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर
💐प्रेम कौतुक-286💐
💐प्रेम कौतुक-286💐
शिवाभिषेक: 'आनन्द'(अभिषेक पाराशर)
और चलते रहे ये कदम यूँही दरबदर
और चलते रहे ये कदम यूँही दरबदर
'अशांत' शेखर
दस्तूर
दस्तूर
Rashmi Sanjay
परिवार
परिवार
अभिषेक पाण्डेय ‘अभि’
भगत सिंह ; जेल डायरी
भगत सिंह ; जेल डायरी
Gouri tiwari
■ विचार
■ विचार
*Author प्रणय प्रभात*
Loading...