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5 Aug 2016 · 1 min read

शिव वंदन

मुक्तक
भोले तो निश्छल भावों के प्यासे हैं।
सुमिरन से पावन करने में गंगा से हैं।
भक्तों के शुचि प्रेमामृत की उर्जा से।
बिष पीकर भी रहते अच्छे खासे हैं।
अंकित शर्मा ‘इषुप्रिय’
रामपुर कलाँ,सबलगढ(म.प्र.)

Language: Hindi
1 Comment · 410 Views
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Books from अंकित शर्मा 'इषुप्रिय'
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