Oct 22, 2016 · 1 min read

शिखरिनी छंद( हाइकू ) जितेंद्रकमलआनंद: गुरु सकाश( पोस्ट७६)

शिखरिनी छंद:
——————
गुरु सकाश ( ध्यान )
करिए प्रात: शाम ।
पायें प्रकाश ।। १ ।।

अक्षराक्षर
शिखरिनी छंद है ।
सत्राहाक्षर ।।२ ।।

नहीं अलभ्य
परम पुरुष है ।
शुभ सुलभ्य ।।३ ।।

—– जितेन्द्रकमल आनंद

156 Views
You may also like:
हायकु
डॉ प्रवीण कुमार श्रीवास्तव, प्रेम
लिखे आज तक
सिद्धार्थ गोरखपुरी
खो गया है बचपन
Shriyansh Gupta
Born again with love...
Abhineet Mittal
सितम देखते हैं by Vinit Singh Shayar
Vinit Singh
Is It Possible
Manisha Manjari
बस करो अब मत तड़फाओ ना
Krishan Singh
बाबा ब्याह ना देना,,,
Taj Mohammad
✍️🌺प्रेम की राह पर-46🌺✍️
शिवाभिषेक: 'आनन्द'(अभिषेक पाराशर)
स्मृति चिन्ह
Shyam Sundar Subramanian
डॉ. भीमराव रामजी अम्बेडकर
N.ksahu0007@writer
हवा-बतास
आकाश महेशपुरी
पुत्रवधु
Vikas Sharma'Shivaaya'
आइसक्रीम लुभाए
Buddha Prakash
अंदाज़।
Taj Mohammad
If we could be together again...
Abhineet Mittal
मानव तन
Rakesh Pathak Kathara
तुम चली गई
Dr.Priya Soni Khare
सुधारने का वक्त
AMRESH KUMAR VERMA
मज़दूर की महत्ता
Dr. Alpa H.
तेरी आरज़ू, तेरी वफ़ा
VINOD KUMAR CHAUHAN
** बेटी की बिदाई का दर्द **
Dr. Alpa H.
"साहित्यकार भी गुमनाम होता है"
Ajit Kumar "Karn"
बुद्ध पूर्णिमा पर तीन मुक्तक।
Anamika Singh
🥗फीका 💦 त्यौहार💥 (नाट्य रूपांतरण)
पाण्डेय चिदानन्द
हनुमंता
Dhirendra Panchal
प्रार्थना(कविता)
श्रीहर्ष आचार्य
लत...
Sapna K S
कलयुग की पहचान
Ram Krishan Rastogi
सुहावना मौसम
AMRESH KUMAR VERMA
Loading...