Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
Sep 5, 2017 · 1 min read

आँसू

आँसुओं की अपनी ही जुबान होती है,
हर आँसू के दिल में छिपी इक दा्स्तान होती है,
माँ की आँख से ढलhके ममत्व का सागर,
बहन के नयन से छलके दुलार की गागर,
माशूक के दीदों से झरे
आसमाँ के मोती हैं
सच ही कहती है रानू
आँसुओं की अपनी जुबान
होती है।

233 Views
You may also like:
पेशकश पर
Dr fauzia Naseem shad
पंचशील गीत
Buddha Prakash
"समय का पहिया"
Ajit Kumar "Karn"
मेरा गुरूर है पिता
VINOD KUMAR CHAUHAN
गुलामी के पदचिन्ह
मनोज कर्ण
रंग हरा सावन का
श्री रमण 'श्रीपद्'
चलो एक पत्थर हम भी उछालें..!
मनोज कर्ण
ब्रेकिंग न्यूज़
सुरेन्द्र शर्मा 'शिव'
बेरोज़गारों का कब आएगा वसंत
Anamika Singh
जीवन संगनी की विदाई
Ram Krishan Rastogi
कुछ पल का है तमाशा
Dr fauzia Naseem shad
बेजुबां जीव
साहित्य लेखन- एहसास और जज़्बात
"निर्झर"
Ajit Kumar "Karn"
तुमसे कोई शिकायत नही
Ram Krishan Rastogi
बंदर भैया
Buddha Prakash
पिता है भावनाओं का समंदर।
Taj Mohammad
आनंद अपरम्पार मिला
श्री रमण 'श्रीपद्'
पिता
Neha Sharma
✍️बचपन का ज़माना ✍️
Vaishnavi Gupta
बेटी को जन्मदिन की बधाई
लक्ष्मी सिंह
जब भी तन्हाईयों में
Dr fauzia Naseem shad
जब चलती पुरवइया बयार
श्री रमण 'श्रीपद्'
पिता
Manisha Manjari
पिता आदर्श नायक हमारे
Buddha Prakash
बुद्ध या बुद्धू
Priya Maithil
आह! भूख और गरीबी
Dr fauzia Naseem shad
पिता मेरे /
ईश्वर दयाल गोस्वामी
प्यार
Anamika Singh
गुमनाम मुहब्बत का आशिक
श्री रमण 'श्रीपद्'
वरिष्ठ गीतकार स्व.शिवकुमार अर्चन को समर्पित श्रद्धांजलि नवगीत
ईश्वर दयाल गोस्वामी
Loading...