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14 Mar 2023 · 1 min read

💐प्रेम कौतुक-433💐

शायद ही कभी चुकता हो उनका कोई कर्ज़,
कभी बताया ही नहीं गया उनसे हमारा फर्ज़,
दिन का ये उजाला भी क्यों अमावस सा लगे,
गुलाब ही दिया था,कहीं दी तो नहीं कोई मर्ज़।

©®अभिषेक: पाराशरः “आनन्द”

Language: Hindi
140 Views
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