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Jun 22, 2022 · 1 min read

शांति….

ढूढ़े है तुझे गली गली शहर शहर
पर…तू है कहां.. मुझे मिले हैं किधर..!!
चैन मिले हमें… आये करार
बेचैनी का हो चुकता उधार…!!
ढूढ़े है तुझे तन-मन की पुकार
तेरा ही चढ़ा रहता हैं बुखार….!!

हैं तू राहत… तू हैं शाँति
जिसे आतुर निगाहे तरसती
पर… तू ये बता तू कहाँ हैं रहती..!!
हैं बड़ी सयानी सभी को तड़पाती
बांटती हैं परेशानी
उल्लास से जगमगाती..!!
तुझको पाने की चाहत में
बेकरारी हैं छाती…
करते ही रहते है जतन कई……
आ अब गले लगा ले हमें.. शांति..!!!!!!

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