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Jun 11, 2021 · 1 min read

शब्द – नदी

निर्मल जल
बहती तरंगिणी
बेपरवाह ।

नदी शैलजा
कल कल करती
तृप्त धरणी ।

बिना स्वारथ
निर्झरिणी झरती
कृतघ्न सब ।

स्वरचित एवं मौलिक
( ममता सिंह देवा , 04/06/2021 )

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