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30 Aug 2022 · 1 min read

वो चाहता है उसे मैं भी लाजवाब कहूँ

ग़ज़ल
वो चाहता है उसे मैं भी लाजवाब कहूँ
किसी चराग़ को कैसे मैं आफ़ताब कहूँ

वो गुलबदन है ज़बाँ पर हैं उसके काँटे भी
तो सोचता हूँ उसे क्या मैं अब गुलाब कहूँ

ख़ुदा ने रुख़ पे दिया क्या जो एक तिल का निशाँ
उसे ये ज़िद है उसे अब मैं माहताब कहूँ

हैं ऐब मुझमें कई झाँक कर जो देखा है
ये हक़ नहीं है मुझे तुमको अब ख़राब कहूँ

मेरी वफ़ाओं का बदला जफ़ा से देते वो
अनीस तुम ही कहो क्या इसे हिसाब कहूँ
अनीस शाह “अनीस”

Language: Hindi
4 Likes · 51 Views
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