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वृक्ष हमारे जीवन का आधार होते हैं।

“वृक्ष हमारे जीवन का आधार”
वृक्ष हमारे जीवन का सबसे बड़ा आधार होते है । वृक्षों से हमे न केवल स्थूल लाभ मिलते है बल्कि विभिन्न प्रकार के सूक्ष्म लाभ भी मिलते है । इंसान को जिंदा रहने के लिए तीन प्रमुख चीजें चाहिए होती हैं,अन्न ,जल,और वायु ईश्वर ने हमे जल और वायु उपहार के रूप में मुफ्त प्रदान की है केवल एक अन्न , हमे उपजना पड़ता है और उसी की पूर्ति में हम इंसान पूरे जीवन भटकते रहते है हर प्रकार के अच्छे बुरे काम केवल पेट भरने के लिए हमारे द्वारा किए जाते हैं जबकि ईश्वर के द्वारा इस अन्न उपजाने की प्रक्रिया में एक दाना बीज बोने पर हमें कई गुना प्रतिफल के रूप में अनाज मिलता है अगर कहीं अनाज की तरह ही जल और हवा भी उपजानी पड़ती तो हमारा क्या हाल होता यह सोचने की बात है। अब, जब हमें जल और हवा दोनों मुफ्त मिली है तो उनका संरक्षण करना हमारा दायित्व बनता है जबकि हम इसके विपरीत दोनो का भरपूर मात्रा में दोहन करते हुए बेफजूल बर्बाद करते है हवा और जल दोनों के संरक्षण के लिए वृक्षों की अहम भूमिका होती है क्योंकि जब पेड़ होंगे तभी हवा और वर्षा संभव है वृक्ष हमारी जमीन के क्षरण को भी रोकते है ।
एक पेड़ जब से जीवन धारण करता है तब से हवा ,छाया , इमारती लकड़ी ,औषधि,पुष्प,और सूख जाने के बाद ईंधन में जलने के लिए लकड़ी प्रदान करता है अर्थात पेड़ का पूरा जीवन दूसरों के लिए समर्पित होता है ।इसीलिए कहा गया है ” वृक्ष कबहु नहिं फल भखै——————–
परमारथ के कारने साधुन धरा शरीर ।” वृक्षों से हमें बहुत बड़ी सीख मिल सकती है इसी के अंतर्गत एक वाकया प्रस्तुत है-
“एक बार एक बच्चा आम के पेड़ से कच्चे आम तोड़ने की कोशिश कर रहा था वह कंकड़ उठाकर पेड़ को मारता और निशाना चूकने से फल न टूटकर कंकड़ वापस जमीन पर आ गिरता ,बच्चा बार बार यही प्रक्रिया दुहरा रहा था इस बीच कुछ फल उसे प्राप्त भी हो गए ,लेकिन तभी वहां का राजा उसी रास्ते से होकर निकला अबोध बालक अपनी उसी धुन में व्यस्त रहा और अचानक कंकड़ पेड़ से टकराकर सीधा राजा के मस्तक पर जा लगा । फिर क्या था बालक डरकर वहां से अपने घर भाग गया और जाकर पूरा वाक्या अपने पिता को बताया । घटना को सुनकर पिता की सांसें जहाँ की तहाँ थम गई सारी रात अमंगल की आसंका में पूरा परिवार सोया नहीं ।
किसी तरह भगवान भाष्कर ने अपनी प्रथम प्रातः कालीन किरणावलियों को प्रस्फुटित किया लेकिन उस बालक के घर में तो मानो चिर कालीन अंधरे ने साम्रज्य जमा लिया हो सभी ब्याकुल थे, कि राजा क्या सजा देगा।इसी उहापोह में वह समय भी आ गया राज्य का एक सिपाही बालक के साथ उसके पिता को भी बुलाने के लिए आ गया सारे मुहल्ले वाले जमा होकर राजा का निर्णय सुनने के लिए राजसभा के एकत्रित हो गए और दण्ड का इंतजार बेसब्री से करने लगे ।तभी राजा ने अपना निर्णय सुनते हुए कहा-यह एक अबोध बालक है जो अपने लक्ष्य अर्थात कच्चे आम प्राप्त करने में तल्लीन था मेरा उधर से गुजरना उसके द्वारा देखा नही गया ,और वह पेड़ जो कितनी बार कंकड़ की चोट खाकर भी बालक को आम देता रहा हम क्या उस पेड़ से भी जड़ हो गए जो इस नासमझ बालक को दंड देगे यह कहाँ तक उचित है और मेरा आदेश है कि इस बालक की
अपने कार्य के प्रति निष्ठा और लगाव को देखते हुए ढेर सारा धन पारितोषिक के रूप में दिया जाय साथ ही सभी साम्राज्य वासियों को पेड़ से सीख लेने की सलाह दी जाती है ।
इसीलिए हमें भी वृक्ष की रक्षा करनी चाहिए अगर अपना भविष्य खतरे से सुरक्षित करना है तो संकल्प लेना होगा कि पेड़ नही कटने देगें।
अमित मिश्र
शिक्षक जवाहर नवोदय विद्यालय शिलांग

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