Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
15 Jul 2016 · 1 min read

वीणा बोलती है

प्रीत ने छेेड़े जो दिल के तार वीणा बोलती है।
लग रहा संगीत मय संसार वीणा बोलती है।

थे दबे अरमान दिल में, शोर वो करने लगे हैं !
खुद कदम मेरे मुहब्बत की तरफ चलने लगे हैं!
बेखबर इतनी कि खुद की ही नहीं कोई खबर है!
धूप है या छाँव पड़ता ही नहीं इसका असर है!
भावनाओं में उठा है ज्वार वीणा बोलती है।
प्रीत ने छेड़े जो दिल के तार वीणा बोलती है।

मन सलोना जागते सपने लगा है पालने अब!
धड़कनों की ताल पर भीे ये लगा है नाचने अब!
भाव मन के कोरे कागज़ पर उतरने से लगे हैं!
गीत, कविता, गीतिका में आप ढलने से लगे हैं!
ढाल सुर में अब यही उदगार वीणा बोलती है ।
प्रीत ने छेड़े जो दिल के तार वीणा बोलती है ।

रात के आगोश में लिपटी लुभाती चाँदनी है !
कर रही मदहोश ऊपर से हवा मन भावनी है !
अब सताते ख्वाब में हैं रोज ही मनमीत आकर!
मुस्कुराती याद भी बीते पलों के गीत गाकर !
लग रहा सुन कर यही झंकार वीणा बोलती है ।
प्रीत ने छेड़े जो दिल के तार वीणा बोलती है ।

डॉ अर्चना गुप्ता
मुरादाबाद

Language: Hindi
Tag: गीत
4 Likes · 8 Comments · 374 Views
You may also like:
अराजकता बंद करो ..
ओनिका सेतिया 'अनु '
समय के उजालो...
मनमोहन लाल गुप्ता 'अंजुम'
बात होती है सब नसीबों की।
सत्य कुमार प्रेमी
गाँधी जी की लाठी
डाॅ. बिपिन पाण्डेय
बेबसी
Varsha Chaurasiya
🌺🌺दोषदृष्टया: साधके प्रभावः🌺🌺
शिवाभिषेक: 'आनन्द'(अभिषेक पाराशर)
*मय या मयखाना*
DR ARUN KUMAR SHASTRI
इतना सन्नाटा क्यों है,भाई?
Shekhar Chandra Mitra
✍️डर काहे का..!✍️
'अशांत' शेखर
अपनी ताकत को कलम से नवाजा जाए
कवि दीपक बवेजा
*बेमिसाल दिखा गया (गीतिका)*
Ravi Prakash
नागफनी बो रहे लोग
शेख़ जाफ़र खान
'तुम्हारे बिना'
Rashmi Sanjay
“श्री चरणों में तेरे नमन, हे पिता स्वीकार हो”
Kumar Akhilesh
मन मोहन हे मुरली मनोहर !
Saraswati Bajpai
आओ मिलकर वृक्ष लगाएँ
Utsav Kumar Aarya
अनमोल घड़ी
Prabhudayal Raniwal
अच्छा लगता है
लक्ष्मी सिंह
हमारे जीवन में शिक्षा महत्व
इंजी. लोकेश शर्मा (लेखक)
" मायूस धरती "
Dr Meenu Poonia
ऐसा है संविधान हमारा
gurudeenverma198
कहो‌ नाम
Varun Singh Gautam
आया रक्षाबंधन का त्योहार
Anamika Singh
بہت ہوشیار ہو گئے ہیں لوگ۔
डॉ सगीर अहमद सिद्दीकी Dr SAGHEER AHMAD
ये कैसा धर्मयुद्ध है केशव (युधिष्ठर संताप )
VINOD KUMAR CHAUHAN
- मेरा प्रेम कागज,कलम व पुस्तक -
bharat gehlot
दिव्य प्रकाश
Shyam Sundar Subramanian
मेरे गुरु
सुरेश कुमार चतुर्वेदी
एक मुद्दत से।
Taj Mohammad
'ख़त'
Godambari Negi
Loading...