Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
25 Jul 2016 · 1 min read

विलीन

हो जाता है “विलीन”
धरा के कोख़ में एक बीज….
विशाल दरख़्त में
परिवर्तन पाने के लिए
धरा के साथ विद्रोह एवं क्रान्ति कर…
धरा के सीने को चीर कर
फूटता है बीज अंकुर बनकर…
“परिवर्तन” के लिए…..
सिर्फ “परिवर्तन” के लिए….

कर चुका हूँ मैं भी “विलीन”
अपने आप को….
अपनी स्वतंत्र सोच को
पवित्र शब्द
पुनर्जन्म के कर्मों को…
आस्था के विस्तार
आधार को
और अपने अस्तित्व को…..
परिवर्तन के लिए…..
सिर्फ परिवर्तन के लिए….
परिवर्तन निश्चित होगा
मुझे विश्वास है…..
उसे होना ही होगा….

सुनील पुष्करणा

Language: Hindi
Tag: कविता
1 Like · 311 Views
You may also like:
वर्तमान से वक्त बचा लो तुम निज के निर्माण में...
AJAY AMITABH SUMAN
✍️सिर्फ दो पल...दो बातें✍️
'अशांत' शेखर
फ़नकार समझते हैं Ghazal by Vinit Singh Shayar
Vinit kumar
माँ कालरात्रि
Vandana Namdev
वक्त की उलझनें
ज्ञानीचोर ज्ञानीचोर
सहरा से नदी मिल गई
अरशद रसूल /Arshad Rasool
कातिल ना मिला।
Taj Mohammad
Freedom
Aditya Prakash
अधूरापन
Harshvardhan "आवारा"
खुशी के रंग
shabina. Naaz
ख्वाब
Swami Ganganiya
मां
Dr. Rajeev Jain
पहाड़ों की रानी शिमला
सुरेन्द्र शर्मा 'शिव'
Writing Challenge- रहस्य (Mystery)
Sahityapedia
बहुजन पत्रकार
Shekhar Chandra Mitra
"नजीबुल्लाह: एक महान राष्ट्रपति का दुखदाई अन्त"
महावीर उत्तरांचली • Mahavir Uttranchali
चाल कुछ ऐसी चल गया कोई।
सत्य कुमार प्रेमी
मैं हिन्दी हूँ , मैं हिन्दी हूँ / (हिन्दी दिवस...
ईश्वर दयाल गोस्वामी
बात क्या है जो नयन बहने लगे
Dr. Rajendra Singh 'Rahi'
ठिकरा विपक्ष पर फोडा जायेगा
Mahender Singh Hans
बुढ़ापा
Alok Vaid Azad
Dear Mummy ! Dear Papa !
Buddha Prakash
उलझनों से तप्त राहें, हैं पहेली सी बनी अब।
संजीव शुक्ल 'सचिन'
एक पाती पितरों के नाम
Ram Krishan Rastogi
अनमोल है स्वतंत्रता
Kavita Chouhan
💐प्रेम की राह पर-57💐
शिवाभिषेक: 'आनन्द'(अभिषेक पाराशर)
सच कह रहा हूँ तुमसे
gurudeenverma198
हिंदी की गौरवगाथा
Vindhya Prakash Mishra
आया रक्षाबंधन का त्योहार
Anamika Singh
नींदों से कह दिया है
Dr fauzia Naseem shad
Loading...