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May 24, 2022 · 1 min read

विरह का सिरा

उत्खनन
कर बैठी
मैं नि:शेष
खोजे अनगिन
अवशेष
पर लुप्त रहा
हर सिरा
अपने विरह का

स्वरचित
रश्मि लहर

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