Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
6 Jul 2022 · 1 min read

वरिष्ठ गीतकार स्व.शिवकुमार अर्चन को समर्पित श्रद्धांजलि नवगीत

ठंडा-ठंडा
और सुहाना,
उखड़ा पीपल
बहुत पुराना ।
बहुत पुराना,बहुत पुराना ।

कानों में
पत्तों की सर-सर
अब भी
गूँज रही है,
पीड़ा ने
ख़ुद पीड़ित होकर
अपनी
बात कही है ।

ख़त्म हुआ
मकरंद बाग का
बंद मधुप का
आना-जाना ।
उखड़ा पीपल
बहुत पुराना ।
बहुत पुराना,बहुत पुराना ।

आँखों में
शाखों की थिरकन
अब भी
तैर रही है ।
श्रद्धा ने
अब तक श्रद्धा की
पीड़ा
बहुत सही है ।

रूठ गई
है, गंध हवा से
क्षीण छंद का
ताना-बाना ।
उखड़ा पीपल
बहुत पुराना ।
बहुत पुराना,बहुत पुराना ।

गन्ने का
सब रस सूखा है
चुप हैं
बरगद,अमुआँ,पाकल,
इमली का
पानी उतरा है
सूखे
गूलर,जामुन,कटहल ।

पिरा रही
है,उड़न परों की
छुटा चोंच का
आबो-दाना ।
उखड़ा पीपल
बहुत पुराना ।
बहुत पुराना,बहुत पुराना ।

ठंडा-ठंडा
और सुहाना,
उखड़ा पीपल
बहुत पुराना ।
बहुत पुराना,बहुत पुराना ।

— ईश्वर दयाल गोस्वामी
छिरारी (रहली),सागर
मध्यप्रदेश ।

Language: Hindi
Tag: गीत
9 Likes · 6 Comments · 217 Views

Books from ईश्वर दयाल गोस्वामी

You may also like:
खुशबू बन कर
खुशबू बन कर
Surinder blackpen
डाला है लावा उसने कुछ ऐसा ज़बान से
डाला है लावा उसने कुछ ऐसा ज़बान से
Anis Shah
अनकहे अल्फाज़
अनकहे अल्फाज़
Suman (Aditi Angel 🧚🏻)
मेरा लेख
मेरा लेख
Ankita Patel
चंद किरणे चांद की चंचल कर गई
चंद किरणे चांद की चंचल कर गई
ठाकुर प्रतापसिंह "राणाजी"
अंजामे-इश्क मेरे दोस्त
अंजामे-इश्क मेरे दोस्त
gurudeenverma198
सर्दी
सर्दी
सुरेश कुमार चतुर्वेदी
Today i am thinker
Today i am thinker
Ankit Halke jha
आज भी
आज भी
Dr fauzia Naseem shad
■ आज की सीख...
■ आज की सीख...
*Author प्रणय प्रभात*
जिंदगी है एक सफर,,
जिंदगी है एक सफर,,
Taj Mohammad
💐प्रेम कौतुक-369💐
💐प्रेम कौतुक-369💐
शिवाभिषेक: 'आनन्द'(अभिषेक पाराशर)
तपन ऐसी रखो
तपन ऐसी रखो
Ranjana Verma
दिसम्बर की रातों ने बदल दिया कैलेंडर /लवकुश यादव
दिसम्बर की रातों ने बदल दिया कैलेंडर /लवकुश यादव "अज़ल"
लवकुश यादव "अज़ल"
न हो आश्रित कभी नर पर, इसी में श्रेय नारी का।
न हो आश्रित कभी नर पर, इसी में श्रेय नारी...
डॉ.सीमा अग्रवाल
दास्तां-ए-दर्द
दास्तां-ए-दर्द
Seema 'Tu hai na'
बदल दी
बदल दी
जय लगन कुमार हैप्पी
क्यूं कर हुई हमें मुहब्बत , हमें नहीं मालूम
क्यूं कर हुई हमें मुहब्बत , हमें नहीं मालूम
अनिल कुमार गुप्ता 'अंजुम'
*सरकारी नौकरी (हास्य-व्यंग्य)*
*सरकारी नौकरी (हास्य-व्यंग्य)*
Ravi Prakash
ख्वाहिशें आँगन की मिट्टी में, दम तोड़ती हुई सी सो गयी, दरार पड़ी दीवारों की ईंटें भी चोरी हो गयीं।
ख्वाहिशें आँगन की मिट्टी में, दम तोड़ती हुई सी सो...
Manisha Manjari
नैतिक मूल्य
नैतिक मूल्य
Saraswati Bajpai
संविधान /
संविधान /
ईश्वर दयाल गोस्वामी
भारत का संविधान
भारत का संविधान
Shekhar Chandra Mitra
फागुन का महीना आया
फागुन का महीना आया
Dr Manju Saini
क्या दिखेगा,
क्या दिखेगा,
pravin sharma
त्रिया चरित्र
त्रिया चरित्र
Rakesh Bahanwal
लाचार बचपन
लाचार बचपन
Shyam kumar kolare
"मजदूर"
Dr. Kishan tandon kranti
शोर जब-जब उठा इस हृदय में प्रिये !
शोर जब-जब उठा इस हृदय में प्रिये !
Arvind trivedi
झूम रही है मंजरी , देखो अमुआ डाल ।
झूम रही है मंजरी , देखो अमुआ डाल ।
Rita Singh
Loading...