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Nov 22, 2016 · 1 min read

रुकी रुकी हैं हसरते

रुकी रुकी हैं हसरते सरहदों पे ही कहीं
दिल ही बता तू अब तेरी सरहदें कहां हैं
*******************************
ठहरती हैं कब कहां दिलों में ये हसरतें
अब तुम बताओ हौसलों मेरी हदें कहां हैं
*******************************
कपिल कुमार
22/11/2016

203 Views
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