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रात

रात ©
(बाल कविता )
___________

रात अँधेरी कारी – कारी
खो गयी कहीं सारी उजयारी
तारों की टिम -टिम है जारी
चाँद का शासन है अब भारी |

अब आ गयी हैं सोने की बारी
दे दो मेरी मखमली चद्दर प्यारी
देखूंगी सपनों में परियां न्यारी
और दुनिया उनकी अनोखी सारी |

_____________

स्वरचित
सह मौलिक

लेखिका :-
©✍️सुजाता कुमारी सैनी “मिटाँवा”
लेखन की तिथि :-28 मई 2021

1 Like · 2 Comments · 241 Views
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