Oct 13, 2016 · 1 min read

राजयोग महागीता: प्रभुप्रणाम::: घनाक्षरी ( पोस्ट २)

छंद: २२
चौसठ कला से युक्त शरणागतवत्सल,
सच्चिदानंद घन आप ही घनश्याम हैं ।
योगनिद्रा का आनंद लेते क्षीर– सागर में ,
आनंद के दाता आप परम विश्राम हैं ।
किसी को सायुज्य , सामीप्य, मोक्ष परम पद,
अथवा किसी को देते गोलोक धाम हैं ।
ऐसे किसी को देते गोलोक धाम हैं ।
ऐसे सर्वज्ञाता और विधाता कृपालु को भी ,
” कमल आनंद ” यह करता प्रणाम है ।।२२ !!

79 Views
You may also like:
आज असंवेदनाओं का संसार देखा।
Manisha Manjari
दिल से निकले हुए कुछ मुक्तक
Ram Krishan Rastogi
बाबा ब्याह ना देना,,,
Taj Mohammad
श्रीराम
सुरेखा कादियान 'सृजना'
सेक्लुरिजम का पाठ
Anamika Singh
आजमाइशें।
Taj Mohammad
मिट्टी की कीमत
निकेश कुमार ठाकुर
भाग्य का फेर
ओनिका सेतिया 'अनु '
कितनी पीड़ा कितने भागीरथी
सूर्यकांत द्विवेदी
बेजुबान
Anamika Singh
मां ने।
Taj Mohammad
बांस का चावल
सिद्धार्थ गोरखपुरी
क्या देखें हम...
सूर्यकांत द्विवेदी
अब ज़िन्दगी ना हंसती है।
Taj Mohammad
कौन किसके बिन अधूरा है
Ram Krishan Rastogi
नीड़ फिर सजाना है
Saraswati Bajpai
एक ख़्वाब।
Taj Mohammad
दोहा छंद- पिता
रेखा कापसे
वर्तमान परिवेश और बच्चों का भविष्य
Mahender Singh Hans
एक आवाज़ पर्यावरण की
Shriyansh Gupta
* तु मेरी शायरी *
DR ARUN KUMAR SHASTRI
मैं चिर पीड़ा का गायक हूं
विमल शर्मा'विमल'
शेर राजा
Buddha Prakash
माँ
आकाश महेशपुरी
आज तिलिस्म टूट गया....
Saraswati Bajpai
*!* मोहब्बत पेड़ों से *!*
Arise DGRJ (Khaimsingh Saini)
तन्हा हूं, मुझे तन्हा रहने दो
Ram Krishan Rastogi
पिता
Aruna Dogra Sharma
इशारो ही इशारो से...😊👌
N.ksahu0007@writer
युद्ध सिर्फ प्रश्न खड़ा करता है [भाग६]
Anamika Singh
Loading...